July 29, 2021
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बस्तर हित मे ,अवैध लौह अवशेष डंपिंग मामले की बस्तर कमिश्नर की जांच रिपोर्ट हो सार्वजनिक-मोर्चा

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बस्तर हित मे ,अवैध लौह अवशेष डंपिंग मामले की बस्तर कमिश्नर की जांच रिपोर्ट हो सार्वजनिक-मोर्चा

25 जून को किरन्दुल स्थित आर्सेल मित्तल निपान उर्फ़ एस्सार कम्पनी के अवैध लौह अवशेष डंपिंग मामले की शिकायत पर की गई थी जाँच-मोर्चा

जाँच के बिंदु व खनिज विभाग के नोटिश पर कम्पनी के जवाब हो सर्वजनिक वही पेशा एक्ट व पुनर्वास मुवावजा अधिनियम भी हो लागू-मोर्चा

बस्तर के पीड़ितों प्रभावितो को मिले न्याय व दोषियों पर हो आपराधिक मामला दर्ज ,मिले 50 लाख मुआवजा व नोकरी- मोर्चा

जिया न्यूज़:-दिनेश गुप्ता के साथ बी महेश राव-दंतेवाड़ा/जगदलपुर,

दंतेवाड़ा:-बस्तर संभाग के दन्तेवाड़ा जिला में किरन्दुल स्थित अर्सलर मित्तल निपान इंडिया कम्पनी जिसे पूर्व में एस्सार के रूप में जाना जाता है उस कम्पनी के द्वारा खनिज अधिनियम2009 वह पर्यावरण व जल अधिनयम की आनपति पत्र की शर्तों उलंघन एवं 1996 पेशा एक्ट के तहत जमीन का उपयोग करने व किराए पर लेने से पहले ग्राम सभा व नगर पालिका के बिना अनुमति के सीधे लौह अवशेष की डंपिंग आदिवाशी व गैर आदिवाशियो की जमीनों पर 30-40 फिट गड्ढा खोद कर कर दिया गया है। वही शासकीय जमीनों पर भी शासकीय अधिकारियों द्वारा नियम को ताक पर रख कम्पनी से लोह अवशेष की डंपिंग करवाई गई हैं। इन सब बिन्दुओ को पूरे तथ्य के साथ बस्तर अधिकार सयुक्त मुक्ति मोर्चा द्वारा स्थानीय प्रभावितो के शिकायत के आधार पर दन्तेवाड़ा जिला कलेक्टर व बस्तर कमिश्नर से पूरे मामले की शिकायत कर कार्यवाही की मांग की थी। वही पूरे मामले की जानकारी बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष से कर जांच करवाने की मांग की गई थी जिस पर बस्तर कमिश्नर ने 3 सदस्यीय जांच कमेटी बना डिप्टी कमिश्नर माधुरी सोम के अध्यक्षता में 25 जून को घटना स्थल पर जाकर पूरे मामले में तथ्यों की जांच की गई थी । जिस में प्रभावितो के बयान व घटना स्थल पर पड़े लोह अवशेष को स्वयं देख कम्पनी के अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए जिसमे यह पाया गया कि इन लौह अवशेष की डंपिंग मामले किसी भी तरह की प्रशासनिक स्वीकृति व ग्राम सभा व नगर पालिका से अनुमति नही ली गई न ही स्थानीय स्तर के प्रशानिक अधिकारियों द्वारा शासकीय जमीनों पर डाले गए लौह अवशेष की अनुमति प्रश्सनिक स्तर पर ली गई ,जबकि प्रशासन द्वारा उक्त कम्पनी को पूरे लौह अवशेष को डंप करने हेतु कडमपाल में 4.3 हेक्टयर जमीन उद्योग विभाग द्वारा आबंटित की गई है। वही पर्यावरण स्वीकृति की शर्तों में एक डेम बना स्थायी रूप से लौह अवशेष को डंप करने अनुमति दी गई थी । जांच में यह भी पता लगा कि वो डेम जो पर्यावरण व जल स्वीकृति हेतु बना हुआ दिखाया गया है। वह एन एम डीसी के लीज अधीन है। जिसे उक्त कम्पनी द्वारा किराए में लिया गया था । जो आज वर्तमान में एन एम डीसी के पास है। ऐसे में लौह अवशेष हेतु कम्पनी द्वारा खरीदी गई 100एकड़ जमीन जो फूल पहाड़ में स्थित है। वहाँ लौह अवशेष न डाल अवैध रूप से किसानों व शासकीय जमीनों में डालने का कार्य किया जा रहा है

बस्तर अधिकार सयुक्त मुक्ति मोर्चा के सयोंजक व प्रवक्ता नवनीत चाँद ने कहा कि जांच के 15 दिन गुजर जाने के बाद भी अब तक बस्तर कमिश्नर द्वारा की गई जाँच रिपोर्ट व कार्यवाही के आदेश का न होना सरकार के बस्तर हित के मंशा पर सवाल खड़ा कर रहा है।मोर्चा बस्तर कमिश्नर से बस्तर के हित मे यह मांग करता है, कि उक्त कम्पनी के खिलाफ किये गए जांच रिपोर्ट के बिन्दुओ व कार्यवाही की अनुशंसा को बस्तर की जनता पटल पर सार्वजिक करे वह पूरे कृत्य में शामिल दोषी लोगो पर कार्यवाही कर आपराधिक मामला भी पंजीबद्ध करे,एवं कंपनी के अवैध कार्य से प्रभावितों प्रति एकड़ 50 लाख मुवावजा व पुनर्वास पैकेज के तहत सभी सुविधाएं मुहैया करवाये तभी यह बस्तर के साथ कम्पनियो के तानाशाही रवैये के खिलाफ एक सही न्याय होगा ,उक्त जांच में कमी पाई जाने पर बस्तर अधिकार सयुक्त मुक्ति मोर्चा प्रभावितो के हित स्तानीय लोगो के साथ सड़क से न्यायलय तक कि लड़ाई लड़ेगा

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