November 26, 2022
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कोरोना का असर पंडालो में नही, घर घर विराजे गणपति कोरोना गाइडलाइन के कारण छोटी मूर्तिया की ज्यादा रही मांग

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा/गीदम,

गीदम:-कोरोना काल में सभी छोटे बड़े त्योहारों की रंगत फीकी हो गई है। इस बार बहुत कम ही पंडालों में गणपति विराज रहे हैं। लोग घरों में ही गणपति की पूजा अर्चना करेंगे। गणेशजी को प्रथम पूजनीय कहा जाता है, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य में पहले श्रीगणेश की पूजा की जाती है। भक्तगण वैसे तो सालभर बप्पा की पूजा करते हैं, लेकिन बुधवार और चतुर्थी को गणपति की पूजा का विशेष महत्व है।कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये इस बार सामूहिक गणेश उत्सव के आयोजन पर कडे नियमों का पहरा लगा दिया गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के हिसाब से जो नियम बने हैं उनका पालन करना समितियों के लिये काफी मुश्किल हो रहा हैं। इस वजह से इस बार अधिकतर गणेश पंडाल सुने रहेंगे। लेकिन घर-घर विघ्नहर्ता गणपति की 11 दिनों तक पूजा-अर्चना होती रहेगी। इस बार प्रशासन द्वारा गणेश स्थापना से लेकर विसर्जन तक कड़े नियमो का प्रावधान किया गया हैं। जिनमें गणेशोत्सव के दौरान यदि पंडाल में किसी भी भक्त को कोरोना संक्रमण होता है। तो उसके इलाज का खर्चा संबंधित समितियों को उठाने जैसे नियम बनाये गये हैं। इस बार मूर्तिकारो ने भी गणेश भगवान की छोटी मूर्तियां ही बनायी हैं। कोरोना संक्रमण ने सभी धार्मिक आयोजनों को सीमित कर दिया है।मूर्तिकारो ने बताया कि इस बार कोरोना काल में मूर्तियों की बिक्री नहीं होने से नुकसान हो रहा है। इस बार बस नाममात्र की ही बिक्री हुई है।हर बार यह त्योहार पूरे धूमधाम के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस महामारी की वजह से सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होंगे।

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