July 5, 2022
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नये कृषि कानून का मतलब स्वतंत्र किसान सशक्त किसान

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जिया न्यूज़:-बब्बी शर्मा-कोण्डागाँव,

कोण्डागाँव:-नये कृषि कानून के पक्ष में सम्पूर्ण राज्य में भाजपा द्वारा पत्रकारवार्ताऔं का कार्यक्रम रखा गया.
इसी कड़ी में स्थानीय अटल-सदन में काँकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद मोहन मण्डावी व छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश महामंत्री किरण देव ने वार्ता में हाल ही में पारित तीन महत्वपूर्ण किसानों से जुड़े बिल के समर्थन में, तथ्यों एवं पहलुओं को रखते हुए विस्तार से प्रकाश डालकर उक्त बिल के विरोध में व्याप्त भ्रम को दूर किया।
प्रदेश महामंत्री किरण देव ने कहा कि बंधनमुक्त राष्ट्रीय बाजार से किसानों की आय बढ़ेगी । वही दूसरी ओर एम एस पी सिस्टम जारी रहेगा अपितु किसान अधिक दाम के लिए खरीदार से मोलभाव कर सकते हैं . किसान एपीएमसी मंडियों में और बाहर भी, जहां दाम अधिक मिले, बेच सकते हैं । इससे फसल के मूल्यों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिलेगी । किसानों की आमदनी बढ़ेगी एवं उच्च मूल्य की नई किस्मों के लिए बाजार उपलब्ध होगा । फसल बुआई से पहले और कटाई के बाद, दोनों स्थिति में आवश्यकता से अनुरूप कमाई के बेहतर विकल्प मौजूद रहेंगे । ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक निवेश और इनोवेशन होगा जिससे ग्रामीण युवाओं में अधिक रोजगार के अवसर सुनिश्चित होंगे ।
कांकेर सांसद मोहन मंडावी ने अपने वक्तय में कहा कि केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर किसानों के साथ कई राउंड की बातचीत कर चुके हैं । किसानों को भ्रामक जानकारी दी जा रही है । उन्हें जानबूझकर उत्तेजित किया जा रहा है । खुद पीएम मोदी ने किसानों से कहा है कि कृषि बिल को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है ।
पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने किसान आंदोलन पर फैलाए जा रहे भ्रम पर कहा कि यह एक देश एक कृषि बाज़ार बनाने की दिशा में लिया गया ऐतिहासिक कदम है । उन्होंने कहा कि एमएसपी सिस्टम जारी है व आगे भी जारी रहेगा । किसानों को पूरी ताकत दी जाएगी कि वे उपज का मूल्य तय करें । भुगतान तय समय सीमा के अंदर करना होगा, अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी औऱ जुर्माना लगेगा । अनुबंध पश्चात किसानों को बिचौलियों कि आवश्यकता नहीं रहेगी जिससे खारीदार सीधे खेत से उपज प्राप्त कर सकेंगे । विवाद की स्थिति में किसानों को सीधा न्यायालय नहीं जाना होगा अपितु स्थानीय विवाद निपटारण तंत्र के माध्यम से
विवादों का निपटारा सुनिश्चित होगा । नया कृषि कानून किसानों को शोषण के भय के बिना समानता के आधार पर प्रसंस्करणकर्ता, एग्रीगेटर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा कारोबारियों, निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने को सक्षम बनाएगा ।
उक्त प्रेस वार्ता के दौरान बड़ी संख्या में जिला पदाधिकारी, किसान मोर्चा के सदस्य व कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

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