June 17, 2021
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ठेकेदार की दबंगई, इंदिरा आवास मकानों को जेसीबी लगाकर ढहाया गरीबों के 3 मकानों को गिराया, पीडि़तों के साथ मारपीट भी की पीडि़तों ने ठेकेदार के खिलाफ सिटी कोतवाली में कराई रिपोर्ट दर्ज

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा,

दंतेवाड़ा:-दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय के चितालंका पंचायत में इंदिरा आवास योजना के तहत बने ग्रामीाों के मकानों को बुलडोजर लगाकर धराशायी करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। दोनों पक्षों की ओर से सिटी कोतवाली में काउंटर रिपोर्ट दर्ज हुआ है। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जूट गई है। जबरन मकान तोड़े जाने की घटना से गांव में तनाव का माहौल है। सरपंच, जनपद अयक्ष समेत पंचायत के अन्य जनप्रतिनिधियों ने कारवाई को गलत बताते हुए ठेकेदार पर पुलिस प्रशासन से कठोर कारवाई की मांग की है।

एक ओर सरकार बेघर, गरीब, शोषित एवं वंचितों को नगर एवं ग्राम में प्राानमंत्री एवं इंदिरा आवास योजना के तहत मकान बनाकर दे रही है वहीं दूसरी ओर कुछ रसूखदार ठेकेदार नियम कायदों को ठेंगे पर रख पैसों की धोंस दिखाते, एवं प्रशासन को मुंह चिढ़ाते गरीबों के आशियानों पर दिन दहाड़े बुलडोजर चलाकर उनके सपनों के आशियानों को जमींदोज करने में लगे हुए हैं। इंदिरा आवास मकान तोड़े जाने की घटना बीते शनिवार की है। चितालंका अस्पतालपारा में करीब 18 साल पुराने बने इंदिरा आवास के मकानों को तोडऩे सुबह 10 बजे ठेकेदार गुलाब सिंह उनके भाई विद्या सागर जेसीबी वाहन लेकर पहूंच गए और एकाएक घरों को तोडऩे लगे। अपने घरों को टूटता देख वहां के रहवासी हड़बड़ा गए और ठेकेदारों को घर तोडऩे से रोकने लगे। तभी आपा खाते ठेकेदार एवं उनके परिजनों ने घर की महिलाओं के साथ मारपीट शुरू कर दी एवं बलपूर्वक तीन घरों को उजाड़ दिया और वहां से चले गए। जिनके मकान टूटे हैं उनके नाम क्रमश: गोंडसाय पिता बंशी, गिरार पिता धरमू व मानसाय पिता लक्ष्मा हैं। पीडि़त नीलाबती, बुजूर्ग मां नोहर दई, सरिता यादव व श्यामलाल ने बताया कि उनके परिजनों को 1998 में इंदिरा आवास योजना के तहत पंचायत द्वारा मकान आबंटित किया गया था। पीडि़तों ने बताया कि पिछले 18 वर्षो से वे इस मकान में रह रहे हैं पर किसी ने आज तक आपत्ति नहीं किया। हमें तो पंचायत की ओर से यहां इंदिरा आवास के तहत मकान आबंटित किया गया था। अगर यह भूमि किसी की निजी थी तो इतने वर्षो तक कहां थे? और इसके लिए हम जिमेदार कैसे? मकान तोडऩें के लिए न तो पंचायत से और न ही तहसीलदार से कोई अनुमति लिया गया न ही कोई लिखित सूचना व समय दिया गया। पीडिता सरिता ने बताया कि ठेकेदार गुलाब सिंह ने न केवल हमारा घर तोड़ा बल्कि हमारे परिवार वालों के साथ मारपीट भी की। 65 वर्षीय बुजूर्ग महिला नोहर दई तक को नहीं छोड़ा उहें भी मारा गया है।

हम लोगों से हाथापाई के बाद ठेकेदार ने खूद ही दीवार पर अपना सर फोड़ लिया और थाने में जाकर हमारे खिलाफ झुठी रिपोर्ट लिखाई कि हम लोगों ने उहें मारा है। जबकि सच्चाई यह है कि ठेकेदार एवं उनके लोगों ने हम लोगों का घर तोड़ा और हमसे मारपीट की। ठेकेदार के इस हरकत से हमारा सारा सामान पंखा, कूलर, मिक्सी, रजाई गददा, बच्चों का पठन पाठन सामग्री सब तहस नहस हो गया। इसकी भरपाई कौन करेगा? घटना वाली जगह पर ही इंदिरा आवास योजना के तहत बने घरों में रह रहे 2 अन्य हितग्राही गुडडी पिता चैतू व पनकू पिता मेानाथ ने बताया कि ठेकेदार गुलाब सिंह ने उहें भी धमकी दी है कि उनका घर भी पट्टे की जमीन पर है अगर जगह खाली न किया तो उनके घरों का भी यही हश्र होगा। ठेकेदार के कृत्य से इलाके के ग्रामीण खासे आक्रोशित हैं। ईधर ठेकेदार का कहना है कि यह जमीन उनके स्वामितव की है। कई बार मौखिक तौर पर जगह खाली करने को कहा गया पर जमीन खाली नहीं किया गया। उक्त तोड़े गए मकान पर कोई भी परिवार वर्तमान में नहीं रह रहा था। लिहाजा हम खाली पड़े मकानों को तोडऩे गए थे इसी दौरान उन लोगों ने हम पर हमला बोल दिया।
वर्जन-यशोदा केतारप (तहसीलदार दंतेवाड़ा)
-इंदिरा आवास मकानों को तोडऩे की शिकायत मिली है। पूरे मामले की जानकारी नहीं है। लेकिन किसी भी मकान को बिना राजस्व विभाग को सूचित किए बगैर तोडऩा अवैाानिक है। जिसने भी तोड़ा है सरासर गलत है। पहले तहसीलदार के समक्ष आवेदन करना होता है फिर उक्त जमीन का सीमांकन होता है। आवेदन हमारे समक्ष नहीं आया है। इसकी जांच करवाएंगे।

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