September 21, 2021
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जैविक खेती के नाम पर किसानों को नही मिल रहा लाभ कुछ एनजीओ उठा रहे फायदा जिले में जैविक खेती हुई है इनके फसलों को अधिक दाम पर लिया जाए

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जिया न्यूज़:-सुभाष यादव-दंतेवाड़ा,

दंतेवाड़ा- जैविक की मुख्य योजना पीकेवीवाई को जमीनी स्तर पर लागू करने में बहुत-सी खामियां हैं। राज्य और जिले स्तर के कृषि एक्सटेंशन अधिकारियों, जिनके कंधे पर जैविक योजना लागू करने की जिम्मेदारी है, ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनको खुद जैविक खेती का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव नहीं है। उनको एक समय पर 10 से 15 अन्य कृषि योजनाओं को भी लागू करना पड़ता है, जिससे वे चाहकर भी इसे पर्याप्त समय नहीं दे पाते। उसका जैविक खेती के विभिन्न पक्षों पर जरूरी प्रशिक्षण भी सही तरीके से नहीं हो पाता। इससे किसान को जमीन पर जैविक खेती करने के लिए जो ज्ञान और मार्गदर्शन चाहिए, वो नहीं मिल पाता। इस वजह से जो किसान जैविक खेती करना चाहता है, उसको भी जानकारी के अभाव में पैदावार घटने के चलते नुकसान का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उसके जैविक खेती छोड़कर वापस रासायनिक खेती में जाने की आशंका बन जाती है और योजना कागजी कार्रवाई व औपचारिकताओं में ही उलझकर रह जाती है।

जिले में भूमगादी नाम की संस्था को जैविक खेती के प्रशिक्षण किसानों को देने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि फसलो में कीड़े लगते है,तो ना ही इनके पास कोई दवा है जो कीड़े मार सके, और भी बहुत सी समस्या है। जैसे खरपतवार खत्म करने की कोई व्यवस्था इस संस्था द्वारा नही की गई है। जैविक खेती के नाम पर संस्था करोड़ो रूपये कमा रही है। जिले के किसानों को कोई लाभ नही मिल रहा है। धान खरीदी का सीजन अभी चल रहा है। किसानों ने जैविक खेती की है उनके फसलो को अधिक दाम पर खरीदा जाए ये संस्था ,कृषि विभाग की जिम्मेदारी है। संस्था किसानों के फसलों को खरीदने के लिये बाजार उपलब्ध करवाए।

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