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आदिवासी क्षेत्र में संविधान की 5वी अनिसूच व पेसा कानून का हो पालन – सीपीआई
बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए वार्ता हो- कमलेश झाड़ी

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जिया न्यूज़:-दन्तेश्वर कुमार-बीजापुर,

बिजापुर:-सिलगेर में हुए नरसंहार व गोली काण्ड की न्यायिक जाँच करने व कैंम्पो के मामलों में संविधान की 5वी अनुसूचि व पेसा कानून का पालन करने के संबंध में मुख्यमंत्री के नाम का एक प्रतिनिधि मंडल के द्वारा SDM बीजापुर को ज्ञापन सौंपा ।
यह कि 13 मई 2021को सुकमा बीजापुर सरहद पर ग्राम सिलगेर में फोर्स के द्वारा कैंप स्थापित करने के खिलाफ सिलगेर व आस पास के ग्रामीण आदिवासी लगातार विरोध कर रहे थे इसी बीच17 मई को पुलिस आर्म्स फोर्स के द्वारा भीड़ पर अचानक फायरिंग क्या गया जिसमें तीन ग्रामीण मौके पर ही मारे गए और18 ग्रामीण जिनमे महिलाएं भी है घायल हो गए।
इस मामले को लेकर सीपीआई की ओर से 8 सदस्यों की जाँच टीम 22 मई 2021को मौके पर गई थी जो तथ्य हमने पाया है इसमें कुछ खास इस प्रकार है।।

  1. मारे गए तीन ग्रामीणों में उइका पांडू, उरसा भीमा व कवासी वागा है।उइका पांडू तिमापुर का रहने वाला था उसका आधार कार्ड, मोबाइल उनके कपड़े 8oo रु भी थे जब वो लोग बासागुड़ास शव लेने पहुंचे तब आधार व मोबाइल की मांग करने पर पहले देने की बात कही पर बादमे देने से पुलिस मुखर गई।।इस मामले में हमारा निष्कर्ष है कि कोई भी नक्सली का आधार कार्ड तो नही होता।।
  2. मृतक उरसा भीमा ग्राम गुंडेम का निवासी था बीजापुर जिले का निवासी था उसके पत्नी व 3 छोटे छोटे बच्चे हैं उन्होंने बताया कि तीन छोटे छोटे बच्चे हैं कैसे पालेगी उन्होंने बताया कि नक्सलियों के बच्चे होते हैं क्या।।
    इसमें हमारा निष्कर्ष है कि नक्सलियों का परिवार नही होता है न ही छोटे छोटे बच्चे होते हैं।।
  3. घायलों में माड़वी हूंगा,जोगा, कुंजाम हुंगा, पुनेम सोनू, जोगा, पुनेम नंदा, पिगड़ा, मड़काम लछु, हुंगा माड़वी आयति, मासा आदि घायल हुए हैं।।
    दरसल इस इलाके के बारे में पुलिस का सामान्य धारणा बनी हुई है कि यहाँ रहने वाले 100% आदिवासी लोग नक्सली हैं जबकि यह धारणा ही गलत है।।
    17 मई की घटना के संदर्भ में सिलगेर में जो आदिवासियों का संघर्ष चल रहा है इस पूरे मामले में सीपीआई निम्नलिखित माँग करती है।।
  4. 17मई को सिलगेर में हुए गोली कांड में 3आदिवासी ग्रामीण मारे गए हैं उसमें दोसी जवानों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज किया जाए।तथा पूरे मामले का न्यायिक जाँच कराई जाए।।
  5. सिलगेर में जो लड़ाई चल रहा है उसमें मुख्य माँग है कि नया स्थापित पुलिस व फोर्स का कैम्प हटाया जाए संविधान की 5वी अनुसूची व पेसा कानून के प्रकाश में यह माँग उचित है।बिना ग्राम सभा की सहमति के बिना कैम्प खोलना इन संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आदिवासी छेत्र के लिए घोषित घोषणा पत्र भी कहता है कि आदिवासी की स्वायत्तता को कायम रखने के लिए यह जरूरी है।।
  6. सरकारें माओवादी समस्या का हल हतियार से करना चाहती है पूर्व में जनजागरण, सलवा जुडूम, ग्रीन हंट जैसे सशत्र व क्रूर हिंसक अभियान नक्सलियों के खिलाप चलाया गया नतीजा क्या मिला।आज 3 -4 किलोमीटर दूरी पर फोर्स का कैम्प स्थापित किया जा रहा है लगभग हर कैम्प का विरोध ग्रामीण करते हैं सिलगेर कैम्प का ज्यादा विरोध हो रहा है जिसकी मीडिया में अधिक चर्चा है।इस सारे मामले में ग्रमीणों में गुस्सा और आशन्तोष तो है।जिसके कारण टकराव बढ़ रहा है।सरकार फोर्स तैनात कर नक्सलियों को खत्म कर शांति लाने की बात कर रही है।जो कि बस्तर में खून खराबा व हिंसा को ही बढ़ावा दे रहा है।यह शांति के लिए वार्ता हो यह हमारी माँग है।।
    अतः सीपीआई जिला परिषद बीजापुर सरकार से अपील करती है कि उपर्युक्त 3माँगो पर गंभीरता से विचार कर बस्तर में शांति स्थापित करने में उल्लेखनीय पहल करने का कष्ट करें।।
    ज्ञापन देने के दौरान उपस्थित साथियों के नाम कमलेश झाड़ी, प्रकाश गोटा, कोवराम हेमला, परसुराम,आदि सदस्य गण उपस्थित रहे।

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