November 30, 2022
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सर्व आदिवासी समाज के द्वारा अपनी 09 सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन किया गया

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जिया न्यूज़ :-राजेश जैन -बीजापुर,

बीजापुर:-जिला मुख्यालय में आज सर्व आदिवासी समाज द्वारा 09 सूत्रीय मांगों को लेकर दिया एक दिवसीय धरना प्रदर्शन,आज के इस प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन में पूरे प्रदेश में सभी जिला मुख्यालयों व ब्लाक मुख्यालयों में एक साथ आयोजित किया गया था,आज ब्लाक/जिला मुख्यालय बीजापुर में भी शांति पूर्वक कोविड नियमो के तहत,सिर्फ पांच लोगों के साथ किया धरना प्रदर्शन।
कुछ दिन पहले सर्व आदिवासी समाज के झण्डे तले प्रतिनिधियों ने 19 जुलाई को ब्लाॅक स्तरीय धरने की अनुमति जिला प्रशासन से मांगी थी। यहां सोमवार को पुराने पेट्रोल पंप के समीप धरने पर सर्व आदिवासी समाज के ब्लाॅक अध्यक्ष मंगल राना, जनपद उपाध्यक्ष सोनू पोटाम, गोण्डवाना समन्वय समिति के ब्लाॅक अध्यक्ष मंगू लेकाम, गोण्डवाना समाज के पूर्व ब्लाॅक अध्यक्ष पाकलू तेलाम एवं सदस्य विजय कुड़ियम बैठे।

समाज ने जिले में खुले अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में षिक्षकों की भर्ती में स्थानीय लोगों को लेने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट से स्थगन की समाप्ति तक पदोन्नति में आरक्षण, आरक्षित पदोन्नत रिक्त पदों को नहीं भरने एवं सामान्य वर्ग के पदोन्नति प्राप्त कर्मचारियों को पदावनत करने की मांग की गई है।
नई भर्तियों में आरक्षण रोस्टर लागू करने एवं बैकलाॅग भर्ती की मांग समाज ने की है। पांचवी अनुसूची क्षेत्र में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदों पर जिला एवं संभाग स्तर पर स्थानीय निवासियों की भर्ती, फर्जी जाति प्रकरणों में दोषियों पर कार्रवाई, छग की 18 जनजातियों की मात्रात्मक त्रुटि हटाकर उन्हें लाभ दिलाने, जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं करने वाले अफसरों पर कार्रवाई, छात्रवृत्ति मामले में आदिवासी छात्रों के लिए आय की सीमा हटाने और वन अधिकार कानून 2006 का कड़ाई से पालन किए जाने की मांग समाज ने की है।

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने पेसा कानून की मांग फिर उठाई है। समाज का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की अनुमति के बगैर पंचायत को नगर का दर्जा दिया गया है। इसे फिर से ग्राम पंचायत में परिवर्तित किया जाए।

उन्होंने कहा है कि खनिज उत्खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जगह लीज में लेकर मालिका को ष्षेयर होल्डर बनाना चाहिए। गांव की जमीन से खनन एवं निकासी का अधिकार ग्राम सभा को दिया जाना चाहिए।

आदिवासी समाज ने कहा है कि सुकमा जिले के सिलगेर में गोलाबारी की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इस काण्ड में मारे गए लोगों के परिवारों को 50-50 लाख रूपए एवं घायलों को 5-5 लाख रूपए के अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की गई। आदिवासी समाज बस्तर में राज्य सरकार की पहल पर नक्सली समस्या के स्थायी समाधान की तलाश भी कर रहा है।

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