September 22, 2021
Uncategorized

वन विभाग और बस्तर पुलिस की टीम के द्वारा बाघ की खाल के मामले में कुल ग्यारह लोगो को किया गया गिरफ्तार

Spread the love

जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा/जगदलपुर,

बाघ की खाल की तस्करी में अधिकतर शासकीय कर्मचारी शामिल

अंधविश्वास की पूर्ति के लिये किया जा रहा वन्य जीवों का शिकार

वन्य जीवों के संरक्षण के नाम पर वन विभाग कर रहा केवल खानापूर्ति

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 8 रेंजर सहित 100 से अधिक बीट गार्ड व फारेस्ट गार्ड है तैनात

जगदलपुर:-वन विभाग और बस्तर पुलिस की टीम के द्वारा बाघ की खाल के साथ आठ लोगों को गिरफ्तार करने के बाद उसमें तीन और लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में 7 पुलिस के जवान और दो स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी व एक शिक्षा विभाग का प्राचार्य भी शामिल है।

मुखबिर की सूचना के आधार पर वन विभाग और पुलिस की टीम ने कार्रवाई की थी। जिसमें आरोपी को रंगे हाथ धर दबोचा गया था। और आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई की गई। मिली जानकारी के मुताबिक बाघ की खाल की लंबाई 228 सेंटीमीटर और चौड़ाई 48 सेंटीमीटर है। इस खरीद-फरोख्त में मारा गया शावक लगभग 3 साल का बताया जा रहा है। और उसकी खाल एक से डेढ़ महीने पुरानी बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस जवान और स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा ही शावक का शिकार किया गया था। गौरतलब है कि 1 वर्ष पूर्व दंतेवाड़ा जिले के बीजापुर कारली में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया था जिसमें वन कर्मियों ने विभिन्न जानवरों की खाल को जब्त किया था। और उसमें भी दो पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई थी। देखा जा रहा हैं कि जानवरों की खाल की तस्करी के मामले में पुलिस विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ रही है। और शासकीय कर्मचारी ही जानवरों के जीवन के दुश्मन बनते जा रहे हैं। गौरतलब है कि 36 साल पहले बीजापुर के इस क्षेत्र को इंद्रावती टाइगर रिजर्व का दर्जा तो दे दिया गया। लेकिन यहां पर बाघों के संरक्षण के लिए कोई पुख्ता प्रयास नहीं किये जा रहे हैं संरक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। जबकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 8 रेंजर व 100 से अधिक बीट गार्ड व फारेस्ट गार्ड की तैनाती की गई है। उसके बाद भी टाइगर रिजर्व एरिया में बाघों का इस तरह से शिकार होना वन विभाग पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है। साथ ही टाइगर रिजर्व के नाम पर आने वाले फंड का बंदरबांट किया जाना दिखाई दे रहा है। साथ ही यहां पर कितने बाघ मौजूद है इसकी भी कोई ठोस व पुख्ता जानकारी विभाग को नहीं है। इसलिए बस्तर में बाघो का घर कहलाने वाला यह टाइगर रिजर्व बाघो के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। और 1983 में टाइगर रिजर्व बनने के बाद से इसमें लगातार बाघों की संख्या घट रही है। देखा जा रहा है कि लोग अंधविश्वास में आकर जानवरों का शिकार कर रहे हैं बताया जाता है कि जानवरों के शिकार के पीछे झड़ती का कारोबार है जिसमें लोग अंधविश्वास में आकर अच्छा खासा पैसा कमाने की लोलुपता में जानवरों का शिकार करते हैं। और तांत्रिक विद्या से पैसा कमाने का यह तरीका अपनाते हैं। लेकिन जिया न्यूज लोगों से अपील करता है कि ऐसे किसी भी अंधविश्वास के फेर में ना पड़े जागरूक रहकर वन्य जीवों का संरक्षण करें।

Related posts

Chhttisgarh

jia

एनजीओ कलिंगा सोशल वेलफेयर के अध्यक्ष रवि दुर्गा ने कोविड-19 की वर्तमान हालात के संबंध में किरंदुल सी एम ओ से की चर्चा…

jia

बस्तर के जाबांज अब्दुल समीर को चौथी बार मिलेगा राष्ट्रपति वीरता पदक
बोरतलाव जिला राजनान्दगांव में पदस्थ टी.आई. चौथी बार होंगे सम्मानित

jia

Leave a Comment

error: Content is protected !!