June 17, 2021
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7 साल से अहिंसा पदयात्रा पर निकले आचार्य श्री महाश्रमण पहुंचे गीदम
हारम तिराहे में नगर के सर्व समाज के लोगो ने किया भव्य स्वागत

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा/गीदम,

शांतिदूत के कदमों से धन्य हुआ गीदम

अहिंसा धर्म हमारे जीवन में रहे : आचार्य महाश्रमण

सत्य-अहिंसा, नशामुक्ति का संदेश देने तीन देश , 20 राज्य व 15000 किमी से भी अधिक दूरी की पदयात्रा कर चुके है आचार्य

गीदम:-सत्य अहिंसा व नशामुक्ति का सन्देश देने तीन देश 20 राज्य व पंद्रह हजार किमी से भी अधिक दूरी तय कर आचार्य श्री महाश्रमण आज गीदम पहुंचे। यहां पहुंचते ही हारम तिराहे में जैन समाज समेत, सर्व ब्राह्मण समाज , गायत्री परिवार , क्षत्रिय समाज, सर्व गुप्ता समाज , राउत समाज , सोनी समाज , अंजुमन इस्लामिया कमेटी , हरिजन समाज , शिरडी साईं सेवा समिति , बंगाली समाज व अन्य समाजजनों , सामाजिक संस्थाओ , नगरवासियो द्वारा भव्य रूप से स्वागत किया गया ।

तत्पश्चात दिगम्बर जैन समाज द्वारा भी मन्दिर परिसर के सामने आचार्य श्री महाश्रमण व उनके साथ पहुंचे जैन साधु संतों का भव्य रूप से स्वागत कर आशीर्वाद लिया गया । इसके पश्चात आचार्य महाश्रमण गीदम के ओसवाल भवन पहुंचे जहा विभिन्न आयोजनों की शुरुआत हुई । जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि आचार्य महाश्रमण गीदम में दो दिन तक रहेंगे । दरअसल गीदम के प्रकाश ममता बुरड़ के पुत्र राहुल 21 फरवरी को रायपुर में आचार्य के समक्ष दीक्षा लेंगे । इसके लिए जैन समाज द्वारा रविवार को गीदम नगर में भव्य रूप से वरघोड़ा रैली भी निकाली जाएगी व विभिन्न कार्यक्रमो का आयोजन होगा।अहिंसा यात्रा प्रणेता शांति दूत आचार्य श्री महाश्रमण सन 2014 में दिल्ली के लाल किला से पदयात्रा आरम्भ कर तीन देश बीस राज्य 15000 से अधिक किमी की पदयात्रा करते हुए 4 जनवरी 2021 को छःग राज्य पहुँचे थे । इसका उद्देश्य अहिंसा यात्रा के माध्यम से लोगो मे अध्यात्म चेतना को जागृत कर उनमे सद्भावना , नैतिकता नशा मुक्ति के माध्यम से मानवता की भावना को प्रबल करना है जिससे विश्व मे शांति , सौहाद्रपूर्ण वातावरण , सम्पूर्ण विश्व के जीवो में करुणा , दया , भाईचारा आपसी सहयोग की भावना विकसित हो सके जिससे सम्पूर्ण विश्व मे सभी जीव एक परिवार की तरह रहे इसी उद्देश्य के साथ आचार्य श्री महाश्रमण देश भर में लंबी दूरी की पदयात्रा करते हुए आज गीदम पहुंचे। प्रवचन सभा में आचार्य श्री ने कहा- अहिंसा को परम धर्म कहा गया है।

आदमी राग-द्वेष के कारण हिंसा में प्रवृत्त हो जाता है। हिंसा करना एक प्रवृत्ति है पर हिंसा करने के पीछे वृत्ति होती है। वृत्ति से मानो प्रवृत्ति हो जाती है। अहिंसा के लिए कहा गया- अहिंसा सब प्राणियों का कल्याण करने वाली है। अहिंसा से शांति मिलती है, सुख मिलता है। हिंसा से दुख पैदा होता है। एक साधु के लिए जीवन भर के लिए तीन करण – तीन योग से प्राणातिपात का प्रत्याख्यान करना अपेक्षित होता है। साधु तो अहिंसा मूर्ति होना चाहिए। गृहस्थ भी अपने जीवन में जितना संभव हो सके अहिंसा के पथ पर चलने का प्रयास करें। जैन शासन भगवान महावीर से संबद्ध है वे अहिंसा के अवतार पुरूष थे। आदमी लोभ, राग-द्वेष व गुस्से के कारण हिंसा कर सकता है। जहां लोभ होता है वहां और चीजें गौण हो जाती है और आदमी अपराध में भी चला जाता है। इसलिए अति लोभ नहीं करना चाहिए। शांतिदूत के स्वागत में मुमुक्षु राहुल बुरड़, गीदम जैन श्री संघ के अध्यक्ष विमल चंद सुराना, ताराचंद बुरड़, उप सभा मंत्री रूपचंद बुरड़ ने अपने विचार व्यक्त किए। नवकार महिला मंडल, तेरापंथ महिला मंडल आदि ने गीत की प्रस्तुति दी।

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