November 30, 2021
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मजदूर की मौत के बाद बस्तर कलेक्टर ने बढ़ाया मदद के हाथ
शव को लाने लग रहे थे 70 हजार, रेडक्रॉस की टीम ने किया मदद

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जिया न्यूज़:-जगदलपुर,

जगदलपुर:-बस्तर के भोले भाले मजदूर ज्यादा पैसो के लालच में बस्तर से पलायन करते हुए आंध्र प्रदेश के अलावा, तमिलनाडु, बैगलोर के अन्य जगह पर काम करने जाते है, ऐसे में ये मजदूर वहां जाकर फस जाते है, जहाँ उनको पैसे तो छोड़ो खाना तक सही रूप से नसीब नही हो पाती है, ऐसे ही एक मामला और प्रकाश में आया है, जहाँ एक मजदूर की मौत तमिलनाडु में होने के बाद शव को घर तक लाने के लिए 70 हजार रुपये लग रहे थे, जिसकी सूचना बस्तर कलेक्टर को लगी और तत्काल मदद के लिए हाथ बढ़ाया,
बताया जा रहा है कि बस्तर जिले के मावलीभाटा में रहने वाले एक आदिवासी मजदूर की मौत पिछले रविवार को तमिलनाडू में हुई, मजदूर की मौत के बाद उसकी लाश को वापस लाने के लिए एंबुलेंस का खर्चा 70 हजार रूपये बताया गया। मजदूर के परिजनों के पास इतने पैसे नहीं थे ऐसे में उन्होंने अपने परिजन के शव को घर तक लाने के लिए अपने खेत को गिरवी रखकर पैसों की व्यवस्था की और मजदूर की मौत के पांच दिनों बाद शुक्रवार को उसका शव परिजनों द्वारा मावलीभाटा लेकर पहुंचे। मजदूर की मौत के बाद लाश को लाने के लिए खेत को गिरवी रखने की जानकारी जैसे ही बस्तर कलेक्टर रजत बंसल को मिली तो उन्होंने तत्काल मजदूर परिवार की आर्थिक सहायता के लिए प्रयास शुरू किये और रेडक्रास सोसायटी से मजदूर परिवार को 70 हजार रूपये दिलवाया गया। यह राशि मजूदर के परिजनों को मिल गई है और अब वे अपना गिरवी रखा हुआ खेत छुड़वा रहे है। रेडक्रास सोसायटी के उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर चेरियन ने बताया कि मावलीभाटा में रहने वाला सुकमन कवासी बोरगाड़ी में काम करने के लिए तमिलनाडू के नामक्कल गाँव गया हुआ था। वहां उसकी मौत हो गई उसकी मौत के बाद उसके शव को घर तक पहुंचाने के लिए परिजनों को ही जद्दोजहद करनी पड़ी और शव को यहां तक लाने के लिए परिजनों ने 70 हजार खर्च कर दिये। परिजनों ने पैसे अपना खेत गिरवी कर लाया था, जिसे प्रशासन से आर्थिक मदद मिलने के बाद वापस परिजनों को दिलवाया जा रहा है।
गौरतलब है कि बस्तर से भोले-भाले आदिवासियों को ज्यादा मजदूरी का लालच देकर दलाल तमिलनाडू, आंध्रा और ऐसे ही अन्य राज्यों में छोड़ आते हैं। इसके बाद हादसा होने की स्थिति में मजदूरों को कोई मदद नहीं मिल पाती। इससे पहले भी मजदूरों को बंधक बनाने जैसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।

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