November 27, 2022
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गरिमा व सादगी के साथ मनाई गईं चाचा नेहरू की जयंती

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जिया न्यूज:-जगदलपुर,

जगदलपुर:-बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर द्वारा सोमवार को राजीव भवन में प.जवाहरलाल नेहरू जी की जयंती गरिमा व सादगी के साथ मनाई गई. सर्वप्रथम उनके छाया चित्र पर माल्यार्पण कर भावभिनी श्रद्धाजंली दी। उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते ईविप्रा उपाध्यक्ष व शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजीव शर्मा ने उनके त्याग तपस्या और योगदानों को बताया वह पहले प्रधानमंत्री थे, स्वतन्त्रता के पूर्व व पश्चात भारतीय राजनीति के केंद्रीय व्यक्तित्व थे, इनका जन्म 14 नवम्बर 1889 में हुआ, जिन्होंने देश को कई विषम परिस्थियों में भी उसकी अर्धव्यवस्था को गिरने नही दिया, उन्हें बच्चों से काफी लगाव था, इसलिये उन्हें चाचा नेहरू का खिताब मिला और देश मे चाचा नेहरू के नाम से जाना जाने लगा। जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे, इनके पिता प्रसिद्ध बैरिस्टर व् समाजसेवी थे, नेहरु जी सम्पन्न परिवार के इकलौते बेटे थे, इनके अलावा इनके परिवार में इनकी तीन बहिने थी. नेहरु जी कश्मीरी वंश के सारस्वत ब्राह्मण थे. नेहरु जी ने देश विदेश के नामी विध्यालयों एवम महाविध्यालयो से शिक्षा प्राप्त की. इन्होने हैरो से स्कूल की प्रारम्भिक शिक्षा एवम ट्रिनिटी कॉलेज लन्दन से लॉ की शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून शास्त्र में पारंगत हुए. 7 वर्ष इंग्लैण्ड में रहकर इन्होने फैबियन समाजवाद एवं आयरिश राष्ट्रवाद की जानकारी विकसित की। संसदीय सचिव /विधायक रेखचन्द जैन ने पूर्व प्रधानमंत्री प. जवाहरलाल नेहरू जी की जयंती पर अपने विचार रखे और कहा की जन्मकाल से इन्हें राजनीति विरासत में मिली थी और उसे काफी अच्छा सम्भाला, देश की आज़ादी में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी कुशाग्रबुद्धि के धनी नेहरू जी ने देश के सफल प्रधानमंत्री साबित हुए महात्मा गाँधी के सरंक्षण में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सर्वोच्च नेता के रूप में उभरे और उन्होंने 1947 में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्वतन्त्रता से लेकर 1964 तक भारत का नेतृत्व कर अच्छी सेवा दी इनके कार्यशैली की जितनी सराहना की जाय कम है नारी शक्ति को भी इन्होंने सम्मान दिलाया आज इन्ही के बदौलत नारी शक्तियां देश मे अपना अहम स्थान बना चुकी है। 1935 में जब ब्रिटिश सरकार ने भारत अधिनियम का प्रस्ताव पारित किया, तब काँग्रेस ने चुनाव लड़ने का फैसला किया. नेहरु ने चुनाव के बाहर रहकर ही पार्टी का समर्थन किया. काँग्रेस ने हर प्रदेश में सरकार बनाई और सबसे अधिक जगहों पर जीत हासिल की. 1936-1937 में नेहरु जी को काँग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. 1942 में गांधी जी के नेतृत्व में भारत छोडो आन्दोलन के बीच नेहरु जी को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद वह 1945 में जेल से बाहर आये. 1947 में भारत एवम पकिस्तान की आजादी के समय नेहरु जी ने सरकार के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इस दौरान
जिला महामंत्री अनवर खान, गौरनाथ नाग,सुनीता सिंह, सुर्या पानी, कौशल नागवंशी, अमर सिंह, दयाराम नाग, सुशील मौर्य, हरिशंकर सिंह,छबीश्याम तिवारी, एम वेंकट राव,महेश ठाकुर,नरेंद्र तिवारी,गुड्डू परिहार, आर के गिरी सहित जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों/सेवादल/महिला कांग्रेस/युवक कांग्रेस/एनएसयूआई/सहित अन्य प्रकोष्ठ/विभाग के पदाधिकारी सहित वरिष्ठ कांग्रेसजन उपस्थित थे।

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