January 20, 2022
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नक्सलियो की राजधानी में आजादी के 73 वर्ष बाद पहुची बिजली बुदरी के आँखों से छलक पड़े खुशी के आंसू,,,

कलेक्टर टोपेस्वर वर्मा ने खुद फावड़ा उठा कर किया मजदूरों के साथ काम। मूलभूत सुविधाएं पहुचाने का उठाया बीड़ा।

नक्सली विरोध के बाद भी जनता प्रशासन का दे रही साथ।

आज़ाद सक्सेना किरंदुल

किरंदुल 15 मार्च विकाशखण्ड कुआकोंडा का वह पोटाली, बुरगुम गांव जहा कभी नक्सलियो की राजधानी हुआ करती थी ओर जहा माओवादी अपनी जनताना सरकार चलाते थे लेकिन अब उस इस क्षेत्र में पुलिस कैम्प खुलने के बाद सरकार का सीधा दखल हो गया है । कलेक्टर टोपेस्वर वर्मा, जिला पंचायत सी0ई0ओ अलोक वर्मा , डी0एन लाल डी0आई0जी सी0आर0पी0एफ और एस0पी डॉ अभिषेक पल्लव खुद ग्रामीणों के साथ फावड़ा तगाड़ी उठा कर काम करते नज़र आते है और गांव के लोग अपनी दुख तकलीफ इनको बताते है ये अधिकारी ने इस धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अपनी जान की परवाह न करते हुए विकाश ओर मूलभूत सुविधाएं पहुचाने का बीड़ा उठाया और सिर्फ 6 माह के अंदर इस गांव में बिजली, सड़क, पी0डी0एस राशन की दुकान, आश्रम, तालाब, बाड़ी फेंसिंग बोरबेल , समुदाय स्वास्थ्य केंद्र ,जैसी कई कार्य कर ग्रामीणों का दिल जीत लिया जो लोग पहले नक्सलियो का साथ देते थे ओर अपने क्षेत्र में किसी भी सरकारी नुमाइंदे को घुसने नही देते थे आज वो खुद विकाश चाहते है और अपनी समस्या प्रशासन को बता रहे है । आपको बता दें कि आजादी के बाद पहेली बार यह बिजली पहुची है ओर यह वही पोटाली गांव है जहाँ 6 माह पहले पुलिस कैम्प खोलने में जवानों के पसीने छूट गए थे हज़ारो ग्रामीणों ने पुलिस ओर जिला प्रशासन को घेर लिया था जिसको संभालने पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी।

ब्लॉक,,,, कलेक्टर टोपेस्वर वर्मा ने बताया कि जब पोटाली गांव के पटेलपारा में बुदरी की यह लाइट लगा कर ब्लफ जलाए तो बुदरी पहेली बार लाइट देख खुशी से रो पड़ी जहा उसके चहरे पे खुशी थी वही आँखों मे पानी। अब इस गांव के लोग हमसे जो चाहिए सीधा मांग रहे है और ग्रामीणों के सहियोग से हम यह मूलभूत सुविधाएं पहुचा रहे है।

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