September 26, 2021
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आदिवासियों की आर्थिक विकास की सोच जब तक साकार नही हो सकती जब तक भृष्ठाचार पर पर्दा डालने का काम जबाबदार करते रहेंगे..

दिनेश शर्मा-गीदम

दन्तेवाड़ा जिले के भृष्ठाचार के नित्य नये कारनामे सामने आ रहे है.. मगर अफसोस तो तब होता जब प्रमाणिता के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही होती नही दिखती..
भृष्ठाचारियो ने दन्तेवाड़ा की छवि इतनी खराब कर दी की यहा के भृष्ठाचार के परत दर परत उजागर के बाद अब लोंग इसे दन्तेवाड़ा के जगह भष्टवाड़ा कहने लगे है..बड़ी शर्मिदगी होती है जब ऐसे शब्द कानो में सुनाई देते है..
आज हम जिले के पशु विभाग के एक ऐसे ही कारनामे का खुलासा कर रहे है.. जिसमे किस तरह चालाक अधिकारियों ने अपने चहते लोंगो के माध्यम से शासन को जमकर चुना लगाया..दर असल लोह अस्क परियोजना से मिलने वाली राशि के चलते.. सब सम्भव है जो अन्य जिलों में ऐसा हो..? उसकी सम्भावना नही होती..दन्तेवाड़ा जिले के आदिवासियों के आर्थिक विकास के सपनो के आड़ में दोनो हाथों से जितना लूट सको लूट लो..इस प्रवर्ति ने सच मे सारी सीमाओ की हद पार कर दी..! वर्षो से राजनीती सरक्षण के चलते ऐसे लोग खूब फल फूल रहे है..ऐसी हालातो में आदिवासियों का कितना भला हो सकता है..? इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है..! वर्षो से यह देखने को मिला की जब किसी भृष्ठाचार पर ज्यादा शोर शराबा होता है.. तो जांच की बात की जाती है.ओर चार दिन बाद जांच की रिपोर्ट आती है और फिर ठंडे बस्ते में लाल कपड़े में लपेट कर रख दी जाती है… दन्तेवाड़ा का पशु विभाग तो बड़े कमाल का विभाग है उज़के हिम्मत को दाद देनी होगी की वो सब कर गुजरता है जिसकी कल्पना नही की जा सकती ..दन्तेवाड़ा जिले का एक मात्र दुग्ध सहकारी समिति क्षीर सागर प्रोजेक्ट जिसके प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी को पुनः शुद्ध कर उपयोग करने हेतु विभाग द्वारा ई टी पी प्लांट अपने चहते सप्लायर के माध्यम से लगवाया गया.. जिसकी लागत लगभग 18 लाख रुपये की बताई गई आश्चर्य तो तब हुवा जब दन्तेवाड़ा के क्षीर सागर में लगे ई टी पी प्लांट से बेहतर सुरक्षित व्यवस्थित ई टी पी प्लांट उसी सप्लायर द्वारा बालोद में 6 लाख तथा वही ईटीपी प्लांट दन्तेवाड़ा में 18 लाख बीजापुर में 12 लाख में स्थापित किया गया..दन्तेवाड़ा में क्षीर सागर के पीछे लगे इस ईटीपी सयंत्र को एक पुराने टैंक के ऊपर खुले में लगाया गया है आश्चर्य तो इस बात का है की प्लॉट जिस टैक पर स्थापित किया गया उसकी छडे दिख रही है जो पूर्व में pwd विभाग द्वारा किसी प्रयोजन के लिये बनाया गया था जो जर्जर हालत में था उसी पुराने टैक पर ईटीपी संयंत्र स्थापित कर दिया गया.. जिससे सम्बंधित ठेकेदार को टेंक भी बनाने की भी आवश्यकता नही हुई.. तथा टैंक की सारी राशि उसे बच गई ..जय गंगा मैया दुग्ध सहकारी समिति बालोद में लगे 6 लाख के ई टी पी प्लांट की तुलना में दन्तेवाड़ा के क्षीर सागर में स्थापित ईटीपी प्लांट अन्य जिलों के प्लाट की तुलना में आधे कीमत का जान पड़ता है..यही नही इस सयंत्र में लगी मोटर की मात्रा भी दन्तेवाड़ा के प्लांट में कम लगाई गई.. निम्न स्तर के कार्य के बाद भी पशु विभाग द्वारा 18 लाख रुपये का प्लांट बताकर लाखो का भुगतान को लेकर मामला गर्माया तो तत्कालीन उपसंचालक मरकाम ने सम्बंधित ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगा दी तथा नोटशीट पर लिखा भी इस सम्बंध में संस्था के प्रबंधक दिलीप सोनी ने भी उपसंचालक मरकाम को पत्र लिखा था..जिस पर उपसंचालक ने रोक की कार्यवाही की थी..इसी बीच उनका स्थान्तरण मुंगेली हो गया.. सूत्रों का कहना है की तत्कालीन उपसंचालक के रोक के बाद भी प्रभारी उपसंचालक डॉक्टर अजमेरसिह द्वारा सम्बंधित को भुगतान में रुचि दिखाते हुवे रोक के बाद भी भुगतान करने की बात कही जा रही है.. आखिर निम्म स्तर के घटिया कार्य होने के उपरांत सम्बंधित सप्लायर को लाखों का भुगतान क्यो ओर कैसे किया गया..? गम्भीर जांच का विषय है की आखिर रोक के बाद कैसे पुनः नोट सीट चलाई गई..? क्या बजह थी..? क्यो ओर किस लिये…? एक ही ई टी पी सयंत्र एक ही सप्लायर द्वारा अन्य जिलों में लगाया जाना ओर उसमे लागत में इतना भारी लाखों का अंतर.. स्पष्ठ भृष्ठाचार प्रतीत होता है वही विभाग की साठ गांठ भी दिखाई पड़ती है.. दन्तेवाड़ा के क्षीर सागर दुग्ध सहकारी संस्थान के पीछे लगे ई टी पी अन्य जिलों की तुलना में घटिया ओर निम्न स्तर का जान पड़ता है उसके बाद भी लाखों का भुगतान किया जाना भृष्ठाचार की परकाष्ठा ही नही बल्कि दन्तेवाड़ा के उपसंचालक कार्यालय के जबाबदारो के मिली भगत का परिणाम है.. जिसने शासन के आंखों में धूल झोख कर अपने चहते ठेकेदार को भुगतान कराया..ऐसे प्रमाणित भृष्ठाचार के बाद भी अगर दोषियों के गिरेबान तक शासन के हाथ पहुंचने में बोने जान पड़े तो आश्चर्य होता है की आखिर लाखो के इस भृष्ठाचार पर अब तक क्यो कोई कार्यवाही नही हुई…ईटीपी पर खर्च होने वाली राशि के असली हकदार आदिवासी है जिनके आर्थिक विकास के सपने हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी देख रहे है..! क्या.? दोषियों पर कोई कार्यवाही सुनिश्चित करने की पहल जबाबदारो की ओर से की जाएगी..? या इन आदिवासियों के विकास निधि हेतु मिलने वाली राशि मे ऐसे ही फर्जीवाडे का अध्याय चलता रहेगा और आर्थिक विकास के नाम पर हम घड़ियाली आंसुओ की धार देखते रहेंगे..!दुर्भाग्य है दन्तेवाड़ा जिले का की इसकी बेबसी पर किसी को तरस नही आता..कल भी यह शोषण की गिरफ्त से मुक्त नही था आज भी बड़ी चालाकी से उसकी छाती पर वही जख्म दिख रहे है..जब तक उन जख्मो का उपचार सही ढंग से नही होगा हम आदिवासियों के आर्थिक विकास की कितनी भी कल्पना करें सब का बेहाल ही जान पड़ेगी ..!आज आवश्यकता है ऐसे लोंगो पर अंकुश लगाने की जो भृष्ठाचार का तांडव करने में मस्त है.. जिन्हें कोई खोफ ही नही रहा… उनके हलक में हाथ डालकर उल्टियां करनी होगी… जो आर्थिक विकास के नाम पर अपना उल्लू सीधा करने का प्रयास करते रहे है..! जिस दिन ऐसा होने लगा तो वास्तविक आर्थिक विकासआदिवासी जिलों में दिखने भी लगेगा..!ओर आदिवासियों को सही लाभ भी मिलेगा..!!

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