September 18, 2021
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लॉकडाउन में तेंदूपत्ता संग्रहण एक बड़ी चुनौती- बसंतराव ताटी

सीमावर्ती राज्य महाराष्ट्र और तेलंगाना से आते हैं कुशल संग्राहक।

बीजापुर ज़िले के 54,000 आदिवासी परिवारों की आजीविका पर सवालिया निशान।

बसंतराव ताटी

बी महेश राव:-बीजापुर

बीजापुर ज़िले में तेंदूपत्ता संग्रहण यहाँ के आदिवासी परिवारों की आजीविका का एक बड़ा साधन है।अप्रैल से जून तक ज़िले के लगभग 54,000 परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण कर रोज़ी-रोटी कमाते हैं।लॉकडाउन के चलते इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण पर संकट के बादल मँडरा रहे हैं।
बीजापुर ज़िले में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिये 28 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियाँ गठित हैं।इन समितियों के माध्यम से 45 लाटों में 80,500 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित है।
राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास समिति,रायपुर द्वारा वर्ष 2020 के लिये संपन्न निविदा-प्रक्रिया के बाद
33 लाटों में 64,600 मानक बोरा संग्रहण लक्ष्य के अनुसार अग्रिम विक्रय किया जा चुका है।कोरोना महमारी के कारण उत्पन्न संकटपूर्ण स्थिति में शेष 12 लाटों में 15,900 मानक बोरा के संग्रहण लक्ष्य का अग्रिम विक्रय न होने के कारण विभागीय संग्रहण की कार्यवाही पर विचार किये जाने के संकेत मिले हैं।
शासन द्वारा तेंदूपत्ता ख़रीदी के लिये 4,000 रुपये प्रति मानक बोरा की दर निर्धारित की गयी है। इस दर से 80,000 मानक बोरा अनुमानित संग्रहण-लक्ष्य के आधार पर बीजापुर ज़िले के लगभग 5,4000 संग्राहक परिवारों को 32.20 करोड़ रुपये पारिश्रमिक के रूप में मिलेंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार निविदा के माध्यम से अधिकार प्राप्त करने वाली संस्थाओं के प्रबंधक तेंदूपत्ता ख़रीदी-प्रक्रियाएँ संपादित करने के लिये 25 अप्रैल तक बीजापुर ज़िले के संबंधित क्षेत्रों में पहुँचेंगे।लेकिन प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अन्य प्रांतों से आने वाले तेंदूपत्ता प्रबंधकों और श्रमिकों को छत्तीसगढ़ प्रदेश के बीजापुर ज़िले में प्रवेश की अनुमति दी जायेगी अथवा नहीं।
पूर्व परंपरा के अनुसार मई के प्रथम सप्ताह में बोरा भर्ती कार्य शुरू हो जाता है।इन कार्यों के कार्य-संपादन के लिये तेलंगाना और महाराष्ट्र राज्यों से कुशल भर्तीगैंग और गिरदावर प्रतिवर्ष बीजापुर ज़िले के संबंधित स्थानों पर आते हैं।ये अमला तेंदूपत्ता संग्रहण की महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि संबंधित लोगों को सीमावर्ती प्रांतों से आने की अनुमति नहीं दी गयी तो इस ज़िले के 54,000 संग्राहक परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी की बड़ी समस्या उत्पन्न हो जायेगी।
उल्लेखनीय है कि इस समय पूरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से गुज़र रहा है। इस महामारी के फैलाव को रोकने के लिये संपूर्ण देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी लॉकडाउन का पालन किया जा रहा है और यह 3 मई तक चलेगा।यदि तेंदूपत्ता संबंधी कार्यों के लिये अन्य राज्यों के श्रमिकों को प्रवेश की अनुमति दी जाती है तो राज्य की सीमाओं पर स्वास्थ्य-परीक्षण शिविर स्थापित कर सीमा पार से आने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य की जाँच के बाद ही उन्हें कार्य-स्थल पर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
वर्तमान परिस्थिति में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े श्रमिकों के संबंध में कोई भी निर्णय लेते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना होगा कि अगर लिये जाने वाले निर्णय से तेंदूपत्ता संग्रहण का कर्य प्रभावित होता है तो इस ज़िले के 54,000 परिवारों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो जायेगा।

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