September 18, 2021
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लॉकडाउन होने के बाद भी शराब की दुकानें खोलने का सरकारी फ़रमान समझ के परे – प्रकाशपुंज,

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय,राजनीतिक विश्लेषक एवं समाजसेवी,रायपुर

समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ में शराब की दुकानें खोलने के सरकारी आदेश पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि समूचे देश में COVID-19 (कोरोना वायरस) के प्रकोप के कारण 24 मार्च 2020 से लॉकडाउन की स्थिति है। लोग परेशान और हलाकान हैं। कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या देश में आज लगभग 38000 के आसपास पहुंच गई है जोकि 1 अप्रैल को 1000 के लगभग थी। लोगों की आय बंद है, लोग आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान हैं। देश भर में तमाम जगहों पर लोग अपने अपने परिजनों से दूर लॉकडाउन के कारण फंसे हुए हैं। उनके पास पैसों की तंगी के ही साथ खाने, रहने की समस्या बनी हुई है। देश की जनता समझ नहीं पा रही है कि इस प्रकार कब तक जीना होगा। लोग सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए घर में ही हैं, बाहर नहीं निकल रहे हैं। शादी ब्याह नहीं हो रहे हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रम बंद है। व्यापार व्यवसाय बंद हैं। यहां तक की भगवान के मंदिर बंद हैं, मस्जिदों में नमाज़ बंद है, गिरिजाघरों में प्रार्थनाएं बंद हैं। स्कूल कॉलेज, अदालत, एयरपोर्ट, रेलवे, बाज़ार,यात्रा सब कुछ बंद हैं तो ऐसी क्या मजबूरी आ गई छत्तीसगढ़ सरकार के सामने जिससे कि उसे शराब की दुकानें खोलने का आदेश जारी करना पड़ा?

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि पहला पक्ष ये है कि, अभी तक देश में छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच बहुत ही सराहनीय काम किया है जिसकी चर्चा पूरे देश में है लेकिन क्या सरकार ने सोचा कि, शराब की दुकानों के खुलने से जब लोग घरों के बाहर निकलेंगे तो सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग की धज्जियाँ उड़ जाएंगी। पुलिस प्रशासन जो पहले से ही परेशान है उसपर एक और नया दबाव पैदा हो जाएगा। जब आमदिनों में शराब की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी रहती थी तो जरा सोचिए लगभग 40 दिन बाद जब लोग शराब खरीदने उमड़ पड़ेंगे तो क्या हाल होगा? अगर उस भीड़ में एक भी कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति हुआ तो क्या होगा ये बताने की जरूरत नहीं है।
दूसरा पक्ष ये है कि जब 40 दिनों से लोग शराब के नशे के बिना रह सकते हैं और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं, शराब पर खर्च होने वाले पैसे भी बच रहे हैं जो इस समय बहुत ज्यादा जरूरी है तो आगे भी रह सकते हैं। जब शराब के सेवन नहीं करने से वे स्वस्थ्य हैं, उनकी इम्यूनिटी पहले से बेहतर है तो सरकार को ऐसी क्या सूझी की ऐसा निर्णय लेना पड़ा? क्या अभी तक काबिले तारीफ काम करने के बाद सरकार अब कोरोना वायरस के प्रकोप के बारे में निश्चिंत हो गई है या फिर किसी दबाव में है? जबकि अभी रह रह कर कोरोना वायरस के मरीज़ों के मामले सामने आ रहे हैं। लोगों की ज़िम्मेदारी इस प्रतिकूल समय में अपने परिवार के प्रति है और सरकार की ज़िम्मेदारी लोगों के प्रति।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ की काँग्रेस सरकार से और बेहद ही संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से ये अपील की है कि शराबबंदी लागू करने के लिए यही उचित समय है क्योंकि लोगों की आदत भी छूट गई है और सम्पूर्ण भारत में लॉकडाउन है। यहाँ तक कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को तो रेड जोन में रखा गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री जी से यही उम्मीद है कि वे इस विषय पर पुनर्विचार करेंगे क्योंकि वे छत्तीसगढ़ की जनता की भलाई सोचते हैं और जनता को उनसे बहुत उम्मीद है। आज पूरा देश भूपेश बघेल को एक सकारात्मक दृष्टिकोण से देख रहा है।

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