October 18, 2021
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मज़दूरों ने रोटी की कीमत अपनी जान देकर चुकाईं – प्रकाशपुंज पांडेय

मज़दूर की जान की कीमत क्या उसकी रोटी से चुकाई जाएगी?

प्रकाशपुंज पांडेय:-रायपुर,

रायपुर:-यह बहुत ही दुखद है। आखिर क्या ग़लती थी उन मज़दूरों की जो सरकार की अव्यवस्था के कारण मजबूर होकर अपने गंतव्य तक पैदल ही निकल पड़े थे। ना रास्ते का पता था, ना सुविधाएँ थीं, थीं तो बस चंद रोटियाँ, जो उन्होंने रास्ते के लिए बचा कर रखी थीं। पर उन्हें क्या पता था की रात को नींद की आगोश में जाने के बाद वे सदा के लिए मौत के आगोश में चले जाएंगे। रेलवे ट्रैक पर उनके शरीर के टुकड़ों के साथ बिखरी पड़ी वह रोटियाँ, किसी की भी रूह को झकझोरने के लिए काफी हैं। ये रोटियाँ बताती हैं इनकी कीमत का अंदेशा कोई नहीं लगा सकता। कभी-कभी जान देकर भी इनकी कीमत चुकानी पड़ती है। इन निर्दोष मजदूरों के साथ भी यही हुआ। आखिर कौन है इन मौतों का जिम्मेदार? इस समाज को निर्धारित करने का वक्त आ गया है। आखिर कब तक ग़रीब, यतीम, मज़दूर प्रशासन की अव्यवस्था का शिकार बनते रहेंगे? कब तक प्रशासन की नाकामी की कीमत वे अपने जान देकर चुकाते रहेंगे?

मैं सीधे तौर पर इसका जिम्मेदार केंद्र सरकार को मानता हूं क्योंकि 22 मार्च को 1 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन उनके लिए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 मार्च को 3 दिन पहले घोषणा कर सकते हैं, तो 21 दिन के शुरुआती देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा करने के लिए उन्हें कम से कम देश की जनता को 5 दिन का तो समय देकर बस, ट्रेनें आदि शुरू करवानी थी ताकि जो लोग जहां-तहां देश में फंसे हुए हैं वे अपने अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच जाएं। अगर वे लोग अपने अपने घरों तक पहुंच जाते तो आज ये जाने नहीं जातीं। आज हजारों किलोमीटर मज़दूर पैदल चलकर अपने घर जाने को मजबूर नहीं होते और उनकी जाने नहीं जाती। भूखे पेट, छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लिए, बुजुर्गों के साथ जाने कैसे और कितने बड़े जिगर के साथ ये लोग अपने घरोंदे के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं, यह सोचकर ही ह्रदय व्यथित हो जाता है।

आज मैं किसी को दोष नहीं दूंगा क्योंकि पता है कि कुछ होना जाना नहीं है। दोष हमारा है कि हम ऐसी सरकारें चुनते हैं जो सत्ता में आने के बाद सत्ता के मद में यही भूल जाते हैं कि उन्हें किसने और क्यों चुना है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुई इस दुखद घटना की मैं कड़ी निंदा करता हूं और उन मज़दूरों और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय, रायपुर, छत्तीसगढ़

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