October 25, 2021
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सहायक आयुक्त के निलंबन के मामले में सत्ता पक्ष के नेता कलेक्टर दन्तेवाड़ा से खफा..!

उम्रदराज व गम्भीर बीमारी को आखिर कैसे नजर अंदाज किया गया गया..!

दिनेश शर्मा:-गीदम,

दंतेवाड़ा:-सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग दन्तेवाड़ा के निलंबन के मामले में शासन के आदेश के बाद आम जनता में इस निलंबन को लेकर शासन प्रशासन की जमकर किरकिरी होती दिख रही है साथ ही शासन प्रशासन की छवि भी धूमिल होती दिख रही हैं.. बस्तर सांसद सहित स्थानीय काग्रेस के नेता भी इस निलंबन से बेहद खफा है..दर असल दन्तेवाड़ा के सहायक आयुक्त बर्मन को कलेक्टर दन्तेवाड़ा द्वारा कोरोना जैसी महामारी को देखते हुवे उन्हें कुआकोंडा विकास खण्ड का प्रभारी बनाया गया था.. कलेक्टर दन्तेवाड़ा ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग दन्तेवाड़ा को दी गई जबाबदारी पर सहायक आयुक्त बर्मन ने अपनी बीमारी के कारणों के चलते उनके स्थान पर विभाग के अन्य एक अधिकारी को नियुक्त कर दिया साथ ही इस सम्बंध में कलेक्टर से उक्त अधिकारी की नियुक्त करने का आग्रह किया..61 वर्षीय सहायक आयुक्त अमर चंद बर्मन जो की उच्च रक्त चाप सुगर के साथ उनकी एक किडनी शून्य होने के अलावा दूसरी भी किडनी आधी खराब होने के चलते कलेक्टर के आदेश को संशोधन हेतु लिखित आग्रह करते हुवे अपने स्वास्थ्य के दस्तावेज प्रमाण स्वरूप प्रस्तुत किये जाने की बात सामने आ रही है..शासन द्वारा बच्चो व बुजुर्गों को कोरोना से बचने के लिये बार बार हिदायत दी जा रहीं है तो फिर प्रश्न यह उठता है की फ़िर 61 वर्षीय बर्मन को कैसे कोविड 19 में डियूटी पर लगाया गया..? जबकि वो गम्भीर बीमारी के साथ अस्वस्थ है यहा हम बता दे की मात्र 1 वर्ष ही शेष रह गये है उनके रिटायर्ड होने में तो फिर ये कैसे सम्भव है की उनकी सेवा कोविड 19 सेंटर पर ली जाये..? कलेक्टर दन्तेवाड़ा ने सहायक आयुक्त बर्मन की कोविड 19 में लगी डियूटी में लापरवाही करने का दोषी मानते हुवे कलेक्टर ने शासन को उनके निलंबन की सिफारिस कर दी…शासन स्तर से कलेक्टर के सिफारिस के आधार पर ए सी बर्मन का निलंबन कर दिया गया..61 वर्षी सहायक आयुक्त के निलंबन की कार्यवाही शासन स्तर से बर्मन के खिलाफ हुई उससे जन मानस में किरकिरी होना स्वभाविक ही था.. सता पक्ष के सांसद सहित स्थानीय नेताओं ने महसूस किया की ये सरासर अन्याय है. सभी ने सहायक आयुक्त बर्मन के निलंबन को न्याय संगत नही समझा ..सांसद बस्तर ने बर्मन पर की गई कार्यवाही पर तीखी प्रक्रिया व्यक्त करते हुवे कहा की क्या..?61 वर्षीय बर्मन के अलावा जिले में कोई और अधिकारी नहीं थे जो कलेक्टर ने बर्मन की डियूटी लगाई. सांसद बस्तर ने कलेक्टर दन्तेवाड़ा शासन की सिफारिश की प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लिया तो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छविंद्र कर्मा ने सहायक आयुक्त बर्मन के निलंबन पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुवे कहा की शासन के स्पष्ठ आदेश के बाद 61 वर्ष के अधिकारी जो शारीरिक बीमारियों से जुझ रहा हो उसे आखिर कैसे महामारी सेंटरो की जबाबदारी दी गई…?जब सहायक आयुक्त ने स्वास्थ्यगत कारणों का प्रमाण सहित असर्थ होते हुवे उनके जगह विभाग के अन्य को जबाबदारी सौपने की बात कही तो कोई गुनाह नही किया..?उसने क्या गलत था.? जो कलेक्टर दन्तेवाड़ा को शासन के सामने निलंबन की सिफारिस की आवश्कता पड़ गई..सहायक आयुक्त का निलंबन न्याय संगत कदापि नही है…कलेक्टर दन्तेवाड़ा को लेकर सता पक्ष के नेताओ ने हाई कमान तक शिकायत करते हुवे अपनी मांग भी रखी.. सत्ता पक्ष के नेताओ तथा कलेक्टर के बीच बिगड़ते ताल मेल के चलते सत्ता पक्ष के नेता बेहद खफा है…! सहायक आयुक्त बर्मन के उम्रदराज के साथ अस्वस्थ्य होने के चलते इस मामले में दन्तेवाड़ा की जनता में शासन स्तर से निलंबन को लेकर भारी किरकिरी हो रही है..! वही सत्ता और विपक्ष के नेता भी कलेक्टर के खिलाफ खुलकर बोलने लगे है..सता पक्ष के सांसद बस्तर तथा छविंद्र कर्मा के तीखे तेवर पर कलेक्टर ने राजनीति आरोपो पर प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया..! प्रश्न यह उठता है की क्या कोई गम्भीर बीमारियों से प्रभावित व्यक्ति जो अपने जीवन मे संघर्ष कर रहा हो असमर्थ हो वो अपनी असर्थता व्यक्त नही कर सकता जबकि उसे शासन के नियमो के तहत पूरी तरह छूट हो..आखिर क्या मजबूरी ऐसी थी की कोविड 19 में 61 वर्षी अस्वस्थ्य जो वर्मन का रहना नित्यान्त जरूरी था..?क्या..? ये अपने पॉवर का गलत प्रयोग नही है..? ये तो वही हुवा की अगर कोई कलेक्टर मुर्दे से कहे की चल उठ..तो मुर्दे को उठाना ही नही है उसे वहां से भागना भी होगा..उसको ये नही बताना है की मैं तो मर चुका हूं साहेब .. वरना साहब नाराज हो जायेगे..ओर अपने पॉवर में आ गये तो फिर श्मशान को ही वाट लगा देंगे..यही तो पॉवर है..! ठीक वर्मन के मामले में भी कुछ ऐसा ही जान पड़ता है की वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन उम्रदराज के चलते व अपनी गम्भीर बीमारी के वजह से उन्होंने जो कलेक्टर के सामने असर्मथता व्यक्त की..? शायद ये ही बर्मन का सबसे बड़ा दोष था.. जिसका खामियाजा उन्हें सेवा के आखरी पड़ाव में निलंबन के रूप में भुगतना पड़ा… आज सत्ता पक्ष के वरिष्ठजन भी इस अन्याय पूर्ण कारवाही के खिलाफ वर्मन जैसे अधिकारी के साथ दिख रहे है..!

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