October 24, 2021
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बोधघाट जल विधुत परियोजना से सम्बंधित सभी पहलुओं जानकारी सार्वजनिक करे सरकार -मोर्चा

प्रभावितों व बस्तर वाशियों को विस्वाश में लेकर उनके अधिकारों के संरक्षण हेतु पहले पहल करें सरकार

1984से1994तक के सभी केंद्रीय विशेषज्ञ एजेंशियो की रिपोर्ट में बस्तर को लेकर जताई गई चिंता पर भी पुनः गौर करे सरकार-मोर्चा

बस्तर अधिकार सयुक्त मुक्ति मोर्चा परियोजना की सम्पूर्ण जानकारी जुटाने व प्रभावितों के हितों की रक्षा हेतु बनाएगी ,अध्यन दल-मोर्चा

जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा

दंतेवाड़ा:-बस्तर के अंदर 40 वर्षों से बन्द पड़े बोधघाट जल विधूत व सिंचाई परियोजना को राज्य व केंद्र सरकार ने पुनः प्रारम्भ करने का फैसला किया है। जिसे केंद्रीय जल आयोग ने भी अपनी मंजूरी प्रदाय कर दी है।इस परियोजना पर लगभग 22 हजार करोड़ से अधिक रुपये खर्च होना सम्भावित है। प्रारंभिक रूप से 42 करोड़ रुपये से वेपकोस नामक कम्पनी को सर्वे कार्य के लिए जारी भी कर दिए गए है।विदित हो की सन 1979 में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने मध्यप्रदेश सरकार के कार्यकाल में बस्तर में बारसूर में 90 मीटर ऊँचाई वाले इस बोधघाट परियोजना की आधारशिला रखी थी। परन्तु सन 1980 में वन संरक्षण अधिनियम बनने के बाद यह परियोजना पुनः अन्नापत्ति के दौर से गुजरते हुए सन 1980 से 1994 तक विभिन विभाग व शोध दल व सामाजिक व आपत्तियों के बाद व आर्थिक कमी के चलते बन्द कर दिया गया था। जिसे पुनः सरकार द्वारा जारी करने का प्रयाश प्रारंभ किया गया है। मोटी -मोटी जानकारी के अनुसार 42 ग्राम पंचायत व 14हजार हेक्टयर जमीन डुबान इलाके के अंतर्गत आ रही है। वही 5 हजार हेक्टयर वन भूमि है। वह वन्य जीव व हजारों लोगों के समाने विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। वही पिछले केंद्रीय विभागों के शोध रिपोर्ट में वन्य जीव ,आदिवाशी जीवन शैली व बांध से उतपन्न बिजली की बड़ी लागत दर पर भी विभिन आपत्तियों व मत मिले थे। तो वही दुनिया व देश मे बांध बनाकर जल व विधूत परियोजना के संचालन पर विभिन प्रकार के मत अनुभवी बुध्दि जीवियों के आ रहे है। तो इन परियोजनाओं से उतपन्न बिजली के लागत पर बेचने के निर्धारित दर पर भी देश के विभिन राज्यो की अपनी अलग अलग राय है। ऐसी परिस्थितियों में सरकार इस बात का ध्यान रखे की बस्तर पांचवी अनुसूचित इलाको में से एक है। जहाँ पेशा कानून के प्रवधान लागू है। जो बस्तर वाशियो को उनकी मंजरी तय करने का अधिकार देते है। ऐसे में बस्तर अधिकार सयुक्त मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता व सयोंजक नवनीत चाँद ने कहा कि वह सरकार व प्रशासन से अपील करता है। कि परियोजना से सम्बंधित सभी पहलुओ की जानकारी बस्तर वाशियो व विशेष कर प्रभावितो के समकक्ष खुल कर रखे व उनका पहले विस्वास मत प्राप्त करे। व नुकशान को कम से कम कर अधिक से अधिक लाभ की तरफ व भविष्य में होने वाले नुकसानदेह को ध्यान पर रख सर्वे के दौरान विकल्प बनाये वही प्रभावितो के विस्थापन व मुवावजा जैसी योजनाओं से सम्बंधित सभी जानकारी समस्त बस्तर वासीयो के सामने सार्वजनिक करें। वही बस्तर के आदिवशी समाज व अन्य समाजों में उपस्थित परियोजना से सम्बंधित जानकारी रखने वाले बुद्धि जीवियों का स्वतंत्र समन्वयक दल बनाये जो परियोजना से सम्बंधित सभी बारीक जानकारियों से रूबरू हो योजना को समझ लोगो को समझा सके। बस्तर अधिकार सयुक्त मुक्ति मोर्चा भी अपने स्तर पर इस परियोजना को समझने हेतु व प्रभावित जनों के अधिकार की रक्षा को सर्वपरि मानते हुए एक अध्यन दल का गठन कर योजना से सम्बंधित सभी पहलू की जानकारी इकठा कर लोगो के बीच जानकारी पहुचायेगा

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