July 29, 2021
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पद लोलुपता के वशीभूत हो कर आपातकाल की भट्टी में झौक दिया था देश को तत्कालीन प्रधानमंत्री ने।

जिया न्यूज़-बब्बी शर्मा:-कोण्डागांव,

कोण्डागांव:-भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय में आज तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल को काला दिवस के रूप में मनाया।
स्थानीय अटल सदन में आयोजित पत्रकार वार्ता में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दिपेश अरोरा ने कहा कि 25 जून 1975 के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा देश मेंं अपनी तानाशाही चलाने के लिये जबरन “आपातकाल” लगाया था।
जो इतिहास का ऐसा ही एक काला अध्याय है जिसे कोई भी भारत वासी कभी नहीं भूल पायेगा,इस काले दिन को बार बार स्मरण करते रहने की जरूरत है ताकि सत्ता के मद में चूर हो कर फिर से कोई व्यक्ती या दल फिर से इस भयानक इतिहास को दुहराने का दूसाहस नहीं कर पाए।
मातृभूमि के सपूतों के त्याग और बलिदान से प्राप्त इस लोकतंत्र को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने आधी रात को खत्म कर देश को फिर से अपना गुलाम बना कर अपना तानाशाहीऔर बर्बतापूर्ण राज चलाने के लिए आपातकाल लगाया था।
आपातकाल में इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वन्दियो का निर्ममता से दमन किया,न्यायपालिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बुरी तरह कुचला और दुनिया के सबसे जीवंत लोकतंत्र भारत को एक फासीवादी देश मेंं बदल दिया गया था।उस दौर में तानाशाह पूरे देश मे काबिज हो गए थे,वो मासूमों पर जुल्म ढा रहे थे.निर्दोषों को जबरन जेल में ठूंंसा गयाथा.बस्तियों पर बुलडोजर चलाकर उजाड़ा दिया गया था.लोगों की जबरन नसबंदिया की गई।
आपातकाल की घोषणा होते ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयंसेवको और तमाम गैरकांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तार कर उन पर प्रताड़नायें देनी शुरू कर दी.देश भर में लाखों लोग जेल गए लोकनायक जयप्रकाश नारायण,मोरारजी भाई देसाई,अटलबिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी जी,नीतीश कुमार,रामविलास पासवान,शरद यादव समेत अधिकतर विपक्ष को जेल में डाल दिया गया था।अविभाजित मध्यप्रदेश से भी कई नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे।रायपुर में उपासने परिवार समेत कई लोग को जेल में डाल दिया गया था.जगदलपुर, कोण्डागाँव जैसे छोटे शहरों में गैर काँग्रेसी नेताओं को भी जेल भेज कर दमनचक्र चलाया था।
उस समय प्रैस पर तत्काल प्रतिबंध लगा कर.25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल लगाने के तुरंत बाद समाचार पत्रों के कार्यालयों की विद्मुत आपूर्ति बाधित कर दी गयी थी,ताकि अधिकतर समाचारपत्र अगले दिन आपातकाल के समाचार ना छाप सकें।327 पत्रकारों को मीसा कानून के तहत जेल में भी बंद कर दिया गया था।290 अखबारों में सरकारी विज्ञापन बंद दिये गये थे.आपातकाल में पत्रकारों का सबसे ज्यादा दमन किया गया था ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम लगाई जा सके, पत्रकारों ने आपातकाल के दर्द को बहुत झेला है।
आज भी छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार के द्वारा आपातकाल जैसे हालात निर्मित किये जा रहे हैं.बात चाहे पत्रकार अर्णब गोस्वामी पर हुए छत्तीसगढ़ में सैकड़ो मुकदमे लाद देने का हो या भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को छग में प्रताड़ित करने की कोशिश का हो,हाल में सोशल मीडिया पर लिखने के कारण दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों की गिरफ्तारी हो चुकी है.बिजली जाने की शिकायत करने मात्र से आम लोगो पर राजद्रोह का मुकदमा दायर किया गया और जेल भेजने की कार्यवाही की गई।
इस कार्यक्रम मे मुख्य रुप से अधिवक्ता गोपाल दीक्षित, नगरपालिका अध्यक्षा श्रीमती हेमकुंंवर पटेल, जितेन्द्र सुराना, जसकेतु उसेन्डी, बालसिह बघेल, जेनेन्द्र ठाकुर,अश्विनी पान्डे,प्रतोश त्रिपाठी, सलीम मेमन, लक्ष्मी ध्रुव,दया राम पटेल, उत्तम मण्डल,कुलवन्त सिह तिमीर, प्रकाश,दिलावर खान, प्रदीप साहु, विकास दुआ सहित सभी कार्यकर्त्ता उपस्थित थे।

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