December 4, 2021
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छत्तीसगढ़ शासन की नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी. योजना विफलता के कगार पर।

रिपोर्टर-विश्व प्रकाश शर्मा कोण्डागांव

“मुख्य मंत्री भुपेष बघेल द्वारा उद्घाटित कोण्डागांव जिले के प्रथम गोठान ने तोडा दम”
:: ★नहीं हो रही कमाई, स्व-सहायता समूह की महिलाएं परेशान, घरों में हो रही अशांति★ ::
कोण्डागांव,मुख्यमंत्री मंत्री छ.ग.शासन द्वारा उद्घाटित कोण्डागांव जिले के ग्राम बडे कनेरा में आनन-फानन में निर्मित प्रथम गोठान ने साल भर में ही दम तोड दिया वहीं गोठान की व्यवस्था का भार संभालने वाली शीतला महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं को साल बीतने के बाद भी, धेले भर की कमाई नहीं होने से जहां समूह की महिलाएं परेशान नजर आ रही हैं, वहीं महिलाओं के घरों में अशांति हो रही है उन्हें घर के अन्य सदस्यों से ताने सुनने पड़ रहे हैं।
ज्ञात हो कि गांव-गांव में गोठान खोलने एवं नरवा, गरवा, घुरवा और बाडी को संवारने से गांव-गांव में निवासरत किसानों के परिजनों सहित समस्त ग्रामीणजनों का आर्थिक उत्थान होने की संभावनाओं को देखते हुए लगभग एक साल पूर्व नरवा, गरवा, घुरवा, बाडी का नारा देकर राज्य के मुख्य मंत्री भुपेष बघेल द्वारा गांव-गांव में नरवा(नालों )की ओर ध्यान देकर पानी रोकने, गरवा(मवेषियों )की देखरेख हेतु गोठान बनाने, गोठान में रखे जाने वाले मवेशियों से प्राप्त गोबर(घुरवा )से खाद बनाकर तथा खाद का उपयोग बाडी(खेतों)में करने की योजना प्रारंभ करने के आदेश जारी किए। मुख्य मंत्री के उक्त आदेश का पालन करने के क्रम में ही जिला प्रशासन कोण्डागांव द्वारा आनन-फानन में जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर बसे तथा जिला व तहसील कोण्डागांव के अंतर्गत आने वाले ग्राम बडे कनेरा में मवेशियों हेतु एक गोठान बनाने के साथ ही समीप बहने वाले नरवा को संवारने का काम किया गया और उक्त कार्य पूर्ण होते ही उक्त गोठान को जिला प्रशासन के द्वारा मुख्य मंत्री के करकमलों से भारी तामझाम के साथ उद्घाघाटित कराया गया था। परन्तु मुख्य मंत्री के उम्मीदों पर फिरा पानी गया.
उद्घघाटन के कुछ ही दिनों बाद से ही बडे कनेरा गोठान में सन्नाटा पसरना शुरु हो गया और साल में ही होते-होते पूरी तरह सन्नाटा पसर चुका है, क्योंकि बडेकनेरा के किसानों/गांववालों ने अपने मवेषियों को गोठान में भेजना ही बंद कर दिया। गांव वालों के अनुसार उन्होंने अपने मवेषियों को गोठान में भेजना इसलिए बंद कर दिया, क्योंकि गोठान में चारा-दाना व पानी की व्यवस्था ही नहीं था। और इस तरह प्रषासनिक अमले द्वारा गोठान में सही व्यवस्था नहीं कराए जाने सकने के कारण अंततः मुख्य मंत्री के उम्मीदों पर पानी फिर ही गया।
कमाई नहीं होने से समूह की महिलाएं हो रही परेषान
जहां एक ओर मुख्य मंत्री के सपने को साकार करने के लिए जिला प्रषासन ने आनन फानन में महज कुछ ही समय में गोठान तैयार कर, गोठान की व्यवस्था को सुचारु रुप से चलाने का दायित्व यहां की एक महिला स्व सहायता समूह षितला समूह को बडी कमाई का सपना दिखाकर दे दिया। शितला स्व सहयता समूह की अध्यक्ष भानमती बघेल, सचिव पूर्णिमा बघेल व दसरीबाई भोयर, रेखा बघेल, सावत्री कृपाल, ललिता कृपाल, पद्मावती कृपाल, राधाबाई पोगरा, हेमबाई, हमेत्रिन बघेल, गनिता कृपाल सदस्यों ने बताया कि जिला पंचायत की सीईओ ने उनसे कहा था कि गोठान के अंदर लगे ईमली, महुआ, आम और अन्य लगाए गए पौधों के बढने के बाद मिलने वाले फलों तथा लगाए गए चारे तथा मवेषियों के गोबर व कचरे से बनाए गए खाद, वर्मी कम्पोस्ट आदि के विक्रय जो रकम मिलेगी वही उनकी मजदुरी/आमदनी होगी। लेकिन गोठान में मवेषी नहीं लाए जाने से वे खाद तो बना नहीं सकी, सिंचाई हेतु लगाए गए मोटर पम्प के नहीं चलने के कारण लगाए गए चारे का भी बढवार नहीं हो सका, कि चारा बेचकर भी कोई बडी कमाई हो सकती। कुल मिलाकर साल भर में उनकी आमदनी जीरो रही। उन्हें उम्मीद थी वे इमली बेचकर कुछ आमदनी हासिल कर लेंगे, लेकिन विगत दिनों ग्राम पंचायत की महिला सरपंच ने गोठान में दखल देकर, ईमली के पेड़ों को ग्राम पंचायत की सम्पत्ति बताते हुए इमली को ही नीलाम कर दिया। वर्तमान में समूह की महिलाएं आमदनी नहीं होने के कारण अपने परिजनों से मिल रहे तानों से बेहद परेषान नजर आ रही हैं। वे बहुत जल्द इस मामले को लेकर जिला प्रषासन से मिलेंगे और समुह में सम्मिलित 11 महिलाओं का साल भर के मजदुरी की मांग करेंगे।
[12/03, 3:32 PM] Punam (Maragao: किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी नरवा गरवा घुरवा बारी नामक योजना संचालित की जा रही है। लेकिन योजना के जमीनी क्रियान्वयन में बरती जा रही अनियमितता के चलते योजना अपने उद्देश्य से भटक रही है। जिले में निर्मित गोठानो मे अधिकांश गोठानो की स्थिति साल भर के अंदर दयनीय हो गई है।

जिले के ग्राम बडे कनेरा में निर्मित गोठान साल भर में ही दम तोडने लगा है। वहीं गोठान का संचालन करने वाले महिला स्व सहायता समूह की महिलाओ को पर्याप्त आय ना होने के कारण आर्थिक तंगी से गुजर ना पड़ रहा है । स्व सहयता समूह की महिलाओं ने बताया आमदनी न होने से उनके घरों में अषांति फैल रही है ।

ग्रामीणो के आर्थिक उत्थान होने की संभावनाओं को देखते हुए लगभग एक साल पूर्व नरवा, गरवा, घुरवा, बाडी का नारा देकर राज्य सरकार द्वारा गांव-गांव में नरवा,नालों की ओर ध्यान देकर पानी रोकने, गरवा,मवेषियों की देखरेख हेतु गोठान बनाने, गोठान में रखे जाने वाले मवेषियों से प्राप्त गोबर,घुरवा से खाद बनाकर तथा खाद का उपयोग बाडी,खेतों में करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के आदेष जारी किए। उक्त आदेष का पालन करने के क्रम में ही जिला प्रषासन द्वारा आनन-फानन में जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर बसे ग्राम बडे कनेरा में मवेषियों हेतु गोठान बनाया गया।

लेकिन उद्घाटन के कुछ दिनो बाद से बडे कनेरा गोठान में सन्नाटा पसरना शुरु हो गया.जहाँ साल भर में ही पूरी तरह सन्नाटा पसर चुका है, किसानों ने गोठान में पर्याप्त चारे की व्यवस्था ना होने से अपने मवेषियों को गोठान में भेजना ही बंद कर दिया है.योजना के जमीनी क्रियान्वयन में बरती जा रही अनियमितताओं के चलते जिले में महत्वाकांक्षी योजना पर पानी फिर चुका है।
जहां एक ओर मुख्य मंत्री के सपने को साकार करने के लिए जिला प्रशासन ने आनन फानन में गोठान तैयार कर, गोठान की व्यवस्था सुचारु रुप से संचालित करने का दायित्व महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं को बडी कमाई का सपना दिखाकर दिया था। शीतला स्व सहयता समूह की अध्यक्षा भानमती बघेल, सचिव पूर्णिमा बघेल, एवं दसरीबाई भोयर, रेखा बघेल, सावत्री कृपाल, ललिता कृपाल, पद्मावती कृपाल, राधाबाई पोगरा, हेमबाई, गनिता कृपाल आदी ने बताया तत्कालिक जिला पंचायत की सीईओ ने आश्वस्त किया था कि गोठान के अन्दर वर्तमान में लगे हुए ईमली महुआ वआम के पेड तथा अन्य नये लगाए गए पौधों के बढने के बाद उनसे मिलने वाले फलों व लगाए गए चारे तथा मवेषियों के गोबर व कचरे से तैयार वर्मी कम्पोस्ट खाद आदि के विक्रय जो रकम मिलेगी वही उनकी आमदनी होगी परन्तु गोठान में मवेषी नहीं आने से खाद नहीं बन पाई, नेपियर घास बेचकर भी कुछ खास आमदनी नही हो रही। वर्तमान में समूह की महिलाएं आमदनी नहीं होने के कारण आर्थिक तंगी से गुजर रही है। जल्द ही समूह की महिलाएं जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर साल भर की मजदुरी की मांग करेंगी।

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