June 20, 2021
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पारम्परिक फूल टेसू/पलाश/फरसा है औषधीय गुणो से परिपुर्ण.

रिपोर्टर-विश्व प्रकाश शर्मा कोण्डागांव

★ पारंपरिक पलाश या टेसू जिसका होली पर रंग बनाने में इस्‍तेमाल होता है वह सिर्फ रंगत में ही सुन्दर नहीं स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी बहुत लाभदायक है.★ इस समय फागुन का महीना चल रहा है. इन दिनों टेसू के पेड़ पूरी तरह से फूलों से लदे हुए हैं. आजकल कई तरह के टेसू की कई किस्‍में नर्सरी में नजर आती हैं. पर पारंपरिक(जंगली) टेसू जिसका होली पर रंग बनाने में इस्‍तेमाल होता आ रहा है वह सिर्फ रंगत में ही नहीं स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी बहुत लाभदायक है. आइए जानते हैं कि क्‍या हैं इस चटख, मनमोहक फूल के लाभ---- इस के पेड़ में फूल फरवरी से अप्रैल तक खिलते हैं.व फल मई-जुलाई माह तक दिखते हैं. पलाश (टेसू)का वैज्ञानिक नाम "ब्यूटिया मोनोस्पर्मा है" आयुर्वेद के अनुसार पलाश के फूल मधुमेह, आंख से संबंधित रोगों , एनीमिया, गुर्दे की पथरी, मूत्र संबंधी विकार और मूत्राशय में दर्द का इलाज करने में सहायक है. अन्‍य क्षेत्रीय बोलियों में पलाश को ढाक, पलाह, जंगल की लौ, आदि नामों से भी जाना जाता है. ●औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोगी●

स्थानीय शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सक सी०बी०वर्मा ने बताया कि भारतीय इतिहास में पलाश का पेड़ महत्वपूर्ण स्‍थान रखता है. इस पेड़ के लगभग सभी हिस्‍से औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाए जाते हैं. भारत में यज्ञ करने में पलाश की लकड़ी का उपयोग किया जाता है. इससे प्राप्‍त होने वाली गोंद बहुत से रोगों के उपचार में उपयोग की जाती है. इस पेड़ पर लाख के कीडे भी पाले जाते हैं जिस से अच्छी खासी आय होती है। इस पेड़ से प्राप्‍त गोंद को गम कीनों कहते हैं. ■पलाश फूल में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व■

आयुर्वेद में इस पेड़ का उपयोग कृमिनाशक और टॉनिक के रूप में किया जाता है. पलाश की पत्तियों में ग्लू कोसाइड, लिनोलेइक एसिड, फोलिक एसिड और लिन्‍गोसेरिक एसिड बहुत अच्‍छी मात्रा में होते हैं. पलाश की छाल में गैलिक एसिड, साइनाइडिंग, लुपेनोन, पैलेसिट्रीन, ब्‍यूटिन, ब्‍यूटोलिक एसिड, और पैलेससिमाइड शामिल होते हैं. पलाश की गोंद में टैनिन, पायरोटेक चिन और श्‍लेष्‍मा सामग्री होती है. इस पेड़ के फूलों में फ्लेवोनॉयड्स, ट्राइटर पेन, आइसोबुट्रिन, कोरोप्सिन, आइसोकोरोप्सिन और सल्‍फरिन भी अच्‍छी मात्रा में उपस्थित होते हैं. ◆पलाश यानी टेसू के फायदे◆

आयुर्वेद के अनुसार पलाश के पेड़ वात और पित्त को संतुलित करता है. इसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है.
यदि आप किसी भी तरह की पेट की समस्‍याओं जैसे कि आंतरिक घावों, अल्‍सर आदि से परेशान हैं तो आप पलाश फूल का उपयोग कर सकते हैं. यह आपके पेट और आंत से संबंधित सभी प्रकार की समस्‍याओं को दूर करने में मदद करता है. पेट की समस्‍याओं को दूर करने के लिए आप 2-3 ग्राम पलाश फूल के पाउड़र का उपयोग करें.

विभिन्‍न त्‍वचा संक्रमणों को दूर करने के लिए इसके बीज का इस्तेमाल किया जा सकता है क्‍योंकि इसके बीजों में बहुत से एंटीऑक्‍सीडेंट और संक्रमण विरोधी गुण होते हैं. पलाश के बीजों का उपयोग कर आप त्‍वचा संबंधि समस्‍याएं जैसे कि दाद, फोड़े, फुंसीयां, अल्‍सर या इनसे होने वाली सूजन को कम कर सकते हैं. पलाश के बीजों को अच्‍छी तरह पीसकर आप इसका पेस्‍ट बना सकते हैं और प्रभावित भाग में इस मिश्रण को लगाकर इन समस्‍याओं से निजात पा सकते हैं.

बुखार के लिए है उपयोगी

यदि आपके शरीर का तापमान हमेशा अधिक (38 डिग्री सेल्सियस से अधिक ) बना रहता है तो यह बुखार होने की संभावना को दर्शाता है. पलाश के फायदे उन लोगों के लिए भी है जिन्‍हें अक्‍सर बुखार आता है. ऐसी स्थिति में आप पलाश के फूलों को पीस कर इसका रस निकालें, इस रस को चीनी और दूध के मिश्रण में मिला कर सेवन करें. यह मिश्रण आपके शरीर के अधिक तापमान को नियंत्रित कर इससे संबंधित सभी प्रकार की समस्‍याओं को दूर करने में आपकी मदद करता है. शरीर के अतिरिक्‍त गर्मी की समस्‍या से छुटकारा पाने के लिए आपको रोजाना 3-4 चम्‍मच मिश्रण का सेवन करना चाहिए.

नियमित रूप से उपयोग कर धीरे-धीरे मोतियाबिंद में फायदा

आयुर्वेद के अनुसार पलाश के फायदे मोतियाबिंद के उपचार को दर्शाता है. इस उद्देश्‍य के लिए आपको पलाश के फूलों के रस की आवश्‍यकता होती है या फिर आप पलाश के बीजों को पानी में भिगों कर छोड़ दें और 48 घंटों के बाद पानी से निकालकर इसका लेप बनाएं. इस पेस्‍ट को आप अपनी आंखों में काजल की तरह लगाएं. इस तरह आप इस पेस्‍ट का नियमित रूप से उपयोग कर धीरे-धीरे मोतियाबिंद के प्रभाव को कम कर सकते हैं.

यदि आप किसी चोट की सूजन से परेशान हैं तो आप इसके लिए पलाश के फूल का उपयोग कर सकते हैं. यह एक आयुर्वेदिक वृक्ष है जो कि आपकी बहुत सी परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है. सूजन को दूर करने के लिए पलाश के फूल बहुत ही प्रभाव कारी होते हैं. आप पानी की भाप में या हल्‍की आंच में पलाश के फूलों को गर्म करें और सूती कपड़े की सहायता से इन गर्म फूलों को प्रभावित क्षेत्र में बांधें. ऐसा करने से आप गठिया, चोट, मस्तिष्‍क आदि की सूजन और दर्द को कम कर सकते हैं. पलाश के फायदे ऐसी समस्‍याओं के प्रभावकारी
[12/03, 4:39 PM] Punam (Maragao: अवसाधिय गुणों की खान पलाश के पेड़
बसंत ऋतु के आगमन के साथ पलाश के पेडो में लालिमा युक्त फूल छा जाते है। फूलों से लदे पलाश के पेड़ अनायास ही अपनी ओर आकर्षित करता है
इन दिनों पलाश के पेड़ पूरी तरह से फूलों से लदे जगह जगह नजर आ रहे हैं। पारंपरिक पलाश जिस का वैज्ञानिक नाम ब्यूटीया मोनोस्पर्मा है , पुरातन काल से हमारे पूर्वज पलाश के फूलों से होली का रंग तैयार करते थे , आयुर्वेद के अनुसार पलाश के चटख, मनमोहक फूल खूबसूरत होने के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि में भी लाभदायक है ।

पेड़ के लगभग सभी हिस्‍से औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किये जाते हैं. भारत में यज्ञ करने में पलाश की लकड़ी का उपयोग किया जाता है. इससे प्राप्‍त होने वाली गोंद बहुत से रोगों के उपचार में उपयोग की जाती है. साथ इस पेड़ से लाख भी प्राप्‍त होती जिसका उपयोग पलाश के फायदे को और अधिक बढ़ा देते हैं. इस पेड़ में फूल फरवरी से अप्रैल तक होते हैं और फल मई से जुलाई के महीने तक दिखाई देते हैं. इस पेड़ से प्राप्‍त गोंद को गम कीनों कहते हैं.

डॉक्टर चंद्रभान वर्मा आयुर्वेद ने नई दुनिया से कहा इस पेड़ का उपयोग कृमिनाशक और टॉनिक के रूप में किया जाता है. पलाश की पत्तियों में ग्लू कोसाइड, लिनोलेइक एसिड, ओलिक एसिड और लिन्‍गोसेरिक एसिड बहुत अच्‍छी मात्रा में होते हैं. पलाश की छाल में गैलिक एसिड, साइनाइडिंग, लुपेनोन, पैलेसिट्रीन, ब्‍यूटिन, ब्‍यूटोलिक एसिड, और पैलेससिमाइड शामिल होते हैं. पलाश की गोंद में टैनिन, पायरोटेक चिन और श्‍लेष्‍मा असंतुलित सामग्री होती है. इस पेड़ के फूलों में फ्लेवोनॉयड्स, ट्राइटर पेन, आइसोबुट्रिन, कोरोप्सिन, आइसोकोरोप्सिन और सल्‍फरिन भी अच्‍छी मात्रा में उपस्थित होते हैं.
आयुर्वेद के अनुसार पलाश के पेड़ वात और पित्त को संतुलित करता है. इसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है.
यदि आप किसी भी तरह की पेट की समस्‍याओं जैसे कि आंतरिक घावों, अल्‍सर आदि से परेशान हैं तो आप पलाश फूल का उपयोग कर सकते हैं. यह आपके पेट और आंत से संबंधित सभी प्रकार की समस्‍याओं को दूर करने में मदद करता है.
विभिन्‍न त्‍वचा संक्रमणों को दूर करने के लिए इसके बीज का इस्तेमाल किया जा सकता है क्‍योंकि इसके बीजों में बहुत से एंटीऑक्‍सीडेंट और संक्रमण विरोधी गुण होते हैं. पलाश के बीजों का उपयोग कर आप त्‍वचा संबंधि समस्‍याएं जैसे कि दाद, फोड़े, फुंसीयां, अल्‍सर या इनसे होने वाली सूजन को कम कर सकते हैं।
आपके शरीर का तापमान हमेशा अधिक (38 डिग्री सेल्सियस से अधिक ) बना रहता है या जिन्‍हें अक्‍सर बुखार रहता है. ऐसी स्थिति में आप पलाश के फूलों का रस आपके शरीर के अधिक तापमान को नियंत्रित कर सभी प्रकार की समस्‍याओं को दूर कर राहत प्रदान करता है.
पलाश के फूलों के रस या बीजों को पानी में भिगों कर छोड़ दें और 48 घंटों के बाद पानी से निकालकर इसका लेप बनाएं. इस को आप अपनी आंखों में काजल की तरह लगाने से आंखों की बीमारियों में फायदा होता है।
यह एक आयुर्वेदिक वृक्ष है जो कि आपकी बहुत सी परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है. चोट की सूजन को दूर करने के लिए पलाश के फूल बहुत ही प्रभावकारी होते हैं. आप पानी की भाप में या हल्‍की आंच में पलाश के फूलों को गर्म करें और सूती कपड़े की सहायता से इन गर्म फूलों को प्रभावित क्षेत्र में बांधें. ऐसा करने से आप गठिया, चोट, आदि की सूजन और दर्द को कम कर सकते हैं।
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