May 26, 2022
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया हिंदी-हल्बी डिक्शनरी-हल्बी व्याकरण किताबों का विमोचन

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जिया न्यूज:-जगदलपुर,

जगदलपुर:-बस्तर के साहित्यकार रूद्र नारायण पाणिग्रही ने हल्बी के 07 हजार से अधिक शब्दों का संकलन कर हिंदी हल्बी शब्दकोश की रचना करने के भागीरथी प्रयास में सफल हुए हैं। इस शब्दकोश का विमोचन एक विशेष समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। रूद्र नारायण पाणिग्रही की हिंदी-हल्बी डिक्शनरी के साथ ही,हल्बी व्याकरण, बस्तर के लोकपर्व, हल्बी कहावतें व मुहावरे एवं हेरीटेज वाक किताबों का विमोचन भी मुख्यमंत्री ने किया।
हिंदी हल्बी शब्दकोश की किताब लिखने वाले साहित्यकार रूद्र नारायण पाणिग्रही ने बताया कि बस्तर संभाग में गोंडी, दोरली, भतरी व हल्बी बोली अलग-अलग भूभाग में प्रचलित है। लेकिन इन सभी बोली भाषाओं को बोलने वाली जनजातियों को एक सूत्र में बांधने यदि किसी भाषा को मान्यता मिली है तो वह हल्बी है। किसी बोली को भाषा की मान्यता तभी मिलती है, जब उसकी स्पष्ट लिपि हो,व्याकरण हो, इन तथ्यों से हल्बी परिपूर्ण है। इसलिए इसे भाषा का दर्जा देने की पहल हो गई है। लिपि व व्याकरण के बाद अब इसका शब्दकोश भी रचा जा चुका है, 273 पृष्ठो में छपे इस शब्द कोष में हल्बी के शब्द, हिंदी में उसका अर्थ, स्वर वव्यंजन भी दिए गए है।
उल्लेखनिय है कि बस्तर में हल्बी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त था। रियासत काल में राजपरिवार के आमंत्रण, लेखन कार्य , आदेश हल्बी बोली में कहे सुने जाते थे। मुनादी के लिए हल्बी का उपयोग आज भी बहुतायत से प्रचलन में है। लोक साहित्यकारों के हल्बी में लिखे कथा,कहानी, काव्य, नाटक से इस बोली का साहित्य संसार बस्तर में समृद्ध है।

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