February 28, 2024
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दंतेवाड़ा आरटीओ दफ्तर दलालों के कब्जे में
विभाग के सारे कामों पर एजेंटों का दबदबा

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जिया न्यूज:-सुभाष यादव-दंतेवाड़ा,

लाइसेंस बनवाने में छूट जाते हैं पसीने,देना पड़ता है कमीशन!

दंतेवाड़ा:-आरटीओ में आम आदमी या अधिकारियों की नहीं चलती, बल्कि विभाग के सारे कामों पर एजेंटों का दबदबा है। लाइसेंस बनाना हो, रजिस्ट्रेशन कराना हो या नामांतरण। यदि आम आदमी खुद से ये काम करा ले तो एवरेस्ट की चोटी फतह करने जैसा है।
लेकिन यदि काम बिना किसी समस्या से कराना हो कार्यालय में घूमने वाले दलालों के पास जाएं, काम फटाफट हो जाएगा। क्योंकि यहां के एजेंटों को मालूम है कि किस अधिकारी-कर्मचारी से कैसे काम लेना है।
दंतेवाड़ा से महज जिला प्रशासन के कार्यालय से 100 मीटर की दूरी पर है। यहाँ पर परिवहन कार्यालयो के सामने एजेंटो की दुकान सजी रहती हैं।
आरटीओ में कोई भी काम कराना सबसे जटिल माना जाता है।
यहां स्वयं से लाइसेंस बनाने में लोगों को दिन में तारे दिखने लगते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में इतनी पेचिदगियां हैं कि उसे फुलफिल कर पाना हर किसी के बस में नहीं होता है।
इन सबसे बचने के लिए दलाल रूपी एजेंट को पकड़ना ही पड़ता है। स्वयं से लाइसेंस बनवाने पहुंचने पर हर बार कोई न कोई खामी निकाल ही दी जाती है।
कई बार तो अधिकारी जानबूझकर परेशान करते हैं। लेकिन जो आदमी जिद्द पर आ जाता है कि काम तो वो खुद कराएगा, तब उसे दो दिन का काम करवाने में दो माह लग जाता है।
तमाम शिकायतों के बाद भी न तो विभाग के लोग बदले और न ही यहां का तौर तरीका। लिहाजा अब लोगों ने भी सिस्टम के साथ समझौता करना शुरू कर दिया हैं।
ऐसे में लोग बार-बार चक्कर काटने से ज्यादा अच्छा दलालों के मार्फत लाइसेंस बनवाना ज्यादा मुनासिब समझते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कई प्रारूप में फार्म होते हैं। जिसे सामान्य तौर पर पूरा कम्प्लीट करना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसमें आंखों की फिटनेस चेकिंग से लेकर ड्राइविंग की परीक्षा देना तक कई तरह की पेचिदगियों से गुजरना पड़ता है। स्वयं का लाइसेंस बनाने के लिए बार-बार आरटीओ के चक्कर काटने की मजबूरी होती है। बावजूद फार्म पूरी तरह दुरूस्त नहीं हो पाता है। यदि किसी तरह फार्म को पूरा कर लिया गया तो लाइसेंस के लिए ड्राइविंग परीक्षण में पास होना टेढ़ी खीर साबित होता है। चार चक्का वाहन के लाइसेंस की बात तो दूर दो चक्का वाहन भी फेल कर दिया जाता है।

वर्जन

इस सम्बंध में जिला परिवहन अधिकारी से फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने धमकी भरी लहजे में बात की उन्होंने कहा तुमको जो करना हैं, करलो।

जिला परिवहन अधिकारी दन्तेवाड़ा।

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