November 30, 2021
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संसद के बाहर का लोकतंत्र,
सही मायने में लोकतंत्र की हार

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा,

दंतेवाड़ा:-आखिरकार साल भर से भी अधिक चले किसान आंदोलन के सामने सरकार झुकी और कानून वापस लेने सरकार ने हामी भरी । इसे व्यापक परिपेक्ष्य में देखे जाने की जरूरत है ।अगर आंदोलन किसानों के लिये था तो अब आंदोलनकारी घर वापसी करेंगे लेकिन यह आंदोलन अपने अलग आचरण के लिए भी अधिसंख्य किसानों से दूर रहा फिर भी मोदी सरकार ने बिल वापस लिया । अब यह साबित हो जाएगा कि इस आंदोलन के पीछे क्या है? बेहद अफसोस की बात यह है कि जनता के द्वारा चुने प्रतिनिधियों ने संसद में इसे विधिवत रूप दिया और अब सड़क पर हठधर्मिता कर इस बिल को लेकर मुठ्ठी भर लोग देश के सामने ऐसा कर गलत उदाहरण पेश कर रहे है । सही मायने में यह लोकतंत्र की हार है जिसे कुछ लोग अपनी जीत मान रहे हैं । प्रधानमंत्री के उदबोधन में कुछ लोगों को अहंकार दिख रहा है ।जिस तरह की परंपरा देश में जन्म ले रही है उससे देश हार रहा है । राजनीति की इस कदर निचले स्तर पर जाना शुभ संकेत किसी भी दल के लिए नहीं है ।प्रश्न यह भी है कि इस जिद का जवाब चुनाव में जनता अगर मोदी को जीत के रूप में भी देती है तो फिर से ऐसे आंदोलन होंगे ।इसे कैसे रोके ? लोकतंत्र में धरना,प्रदर्शन का अधिकार तो सभी को है लेकिन क्या इसके आड़ में लगातार आंदोलन कर सरकार पर दवाब बनाने का नया लोकतंत्र हम देखते रहेंगे ?इस मसले पर अब बड़ी बहस होना चाहिए और इस प्रकार के आंदोलन को रोकने कोई उपाय जल्द खोजने होंगे अन्यथा संसद में कोई भी बिल पास होते ही मोर्चा बैठ जाएगा और दूसरा लोकतंत्र बिल वापसी के दिन गिनते व्यवस्था खराब करता रहेगा ।

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