September 18, 2021
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स्वास्थ्य योजनाओ का साइड डाउन,
बस्तर कैसे रहे आयुष्मान?-मुक्तिमोर्चा

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जिया न्यूज़:-जगदलपुर,

केंद्र सरकार की आयुष्मान ,राज्य सरकार की यूनिवर्सल हेल्थ योजनाये,बस्तर में हवा -हवाई घोषणा -नवनीत चाँद

जगदलपुर:-बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के मुख्य सयोंजक नवनीत चाँद ने बस्तर में संचालित केंद्रीय आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के जमीनी हालात व राज्य सरकार द्वारा यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम को लागू करने की घोषणा के वर्षों बीतने के बाद भी लागू नहीं करने के कारण बस्तर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के चलते जनता को हो रही परेशानी को केंद्र व राज्य सरकार की प्रशासनिक नाकामी बता दोनो सरकारो को आड़े हाथ लेते हुये बयान जारी कर कहा की ,बस्तर में सभी स्वास्थ्य योजनाओ के क्रियान्वयन की नीयत इन की साइड की तरह डाउन ,तो आखिर बस्तर कैसे रहे आयुष्मान? मुक्तिमोर्चा ने बयान में आगे कहा कि ,18 अप्रैल 2018 को देश के प्रधानमंत्री ने देश के गरीबो को निशुल्क स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के जांगला ग्राम पंचायत में आकर इस योजनाओं का शुभारंभ किया था। विडंबना है। कि आज वह योजना बस्तर में क्रियान्वयन की इच्छा शक्ति की कमी व तकनीकी साइट के डाउन के चलते ठंडे बस्ते में चली गई है। बस्तर की जनता जिला अस्पतालों ,च्वाईस सेंटरों के चक्कर काट रही है। पर साइड में लोड केपेस्टी की कमी के चलते सर्वर डाउन का खामियाजा बस्तर की जनता को इस योजनाओं के लाभ से वंचित हो कर चुकाना पड़ रहा है। वही शासकीय अस्पतालो में सुव्यवस्थित इलाज के अभाव व निजी अस्पतालों की योजनाओं से कम कनेक्टिविटी के चलते ,बस्तर के लोगों अपनी जान बचाने कर्ज के तले तब निजी खर्च पर अन्य राज्य के बेहतर अस्पतालों की तरफ रुख अख्तियार करने हेतु मजबूर होना पड़ रहा है। वही केंद्र की आयुष्मान योजनाओ में कई कमी गिना ,राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने विदेशों का दौरा कर, यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम लागू करने की घोषणा की थी।और यह दावा किया गया था। कि यह स्कीम आयुष्मान योजनाओ के लाभ के दायरे से वंचित सभी लोगो को लाभ प्रदाय करेगा पर आज पर्यंत तक ऐसी किसी भी योजनाओ का जमीन पर लागूं नहीं होना व केंद्रीय आयुष्मान योजनाओ का क्रियान्वयन में बस्तर में ढप होना इस बात का परिचायक है। कि केंद्र व राज्य सरकारें, बस्तर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सुधार के प्रति न केबल लापरवाह है। बल्कि गैर जिमेदार भी है। इसकी बड़ी वजह बस्तर में सत्ता व विपक्ष में स्थापित दोनो राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों व बड़े नेता व पदाधिकारीयो की अपने राजनीतिक आकाओ से डर के चलते बस्तर हितों के प्रति खामोशी बरतना है। यहाँ सिर्फ स्वास्थ्य भवन के नाम करण की ओछी राजनीति कर ,सड़क की लड़ाई व बयान बाजी तक उनकी राजनीति सीमित है।इनको बस्तर में निवासरतजनो को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाओ को स्थापित कर जनमानस को लाभ दिलवाने में कोई रुचि नही है।बस्तर में बस्तर के विकास राशि DMF, सी ए सार ,NMDC व केंद्रीय मद से मेडिकल कालेज में नई व्यवस्था ,जिला अस्पतालों में डॉक्टर की भर्ती ,उपकरण व सुपर स्पेशलिस्ट असपताल के भवन निर्माण हेतु राशि आबंटित करने के बावजूद सुस्त प्रशासनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का खामियाजा अमीर धरती के गरीब बस्तर के लोगों को उठाना पड़ रहा है। जो बस्तर के परिदृश्य से बेहद चिंताजनक विषय है। मुक्तिमोर्चा केंद्र व राज्य सरकार के जनप्रतिनिधियों व आला अधिकारियों व प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री से अपील करता है। कि बस्तर के लोगो के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरत रहे स्वास्थ्य प्रशानिक व्यवस्थाओं में रोक लगाते हुए कसावट ला स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को सरल तरीके से ज्यादा से ज्यादा काउंटर खोल जनमानस को लाभान्वित करवाये ,ताकि हर बस्तरवासियों के मुख से गर्व से निकले अपना ध्यान,मंत्र महान ,देश व बस्तर रहे आयुष्मान

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