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खुद को गोली मारने का सिलसिला आखिर थमेगा कैसे? मानसिक अवसाद से उबरने हो कवायद

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा,

दंतेवाड़ा:-आज फिर समेली 111 बटालियन के जवान ने खुद को गोली मार ली ।फिलहाल घायल जवान को एयरलिफ्ट कर रायपुर ले जाने की जानकारी सूत्र बता रहे है ।लगातार इस प्रकार की घटनाओं से नए सिरे से विषय पर मंथन की आवश्यकता है आखिर जवान क्यों आत्मघाती कदम उठाते हैं ?बस्तर संभाग में निरंतर हो रहे इन घटनाओं पर चुप्पी साध लेना समस्या का हल नहीं हो सकता ।मानसिक अवसाद की दशा में इस प्रकार की घटना होती है ।अक्सर सुना जाता है कि जवान लगातार ड्यूटी के उबाऊपन और छुट्टी नहीं मिलने से पीड़ित होते हैं ।अनुशासन के पालन में अत्यधिक कड़ाई भी एक कारक माना जा सकता है।सीनियर अधिकारी जवानों से दोस्ताना तालमेल बनाये ताकि बेझिझक जवान अपनी बात कह सकें । सुरक्षा के लिए तैनात ये जवान परिवार से अलग होते हैं ।कई जगह मोबाइल का नेटवर्क भी नहीं होता ऐसे में संवाद नहीं होने के कारण एकाकीपन होता है जरूरी यह है कि ऐसे जवान के लक्षण को पहचान कर उसे राहत देने कोई उपाय उनके ही यूनिट इंचार्ज का होना चाहिए ।इस प्रकार की घटना को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए ।पूरी ईमानदारी से पड़ताल करना चाहिए ।अपनी पीड़ा जब जवान किसी से कह नहीं सकेगा तब ही वह आत्मघाती कदम उठाता है । सुदूर क्षेत्रों में तैनात इन जवानों का समय समय पर जांच होना चाहिये ताकि मानसिक रूप से पीड़ित जवान अपनी समस्या बता सके और उसका समय रहते इलाज हो सके ।बहुत आवश्यक यह भी है कि जवानों पर बारीक नजर रखी जाए कोई भी असामान्य लक्षण पाए जाने पर उससे संवाद कर समस्या से निपटा जा सकता है ।मनो चिकित्सक मानते हैं कि यह कुछ पल की मानसिक दशा होती है और व्यक्ति घातक कदम उठा लेता है ।इसे रोकने सुरक्षा कंपनियों के दायरे में ही व्यवस्था हो ताकि जवान किसी भी तरह के नकारात्मक विचार से बाहर आकर पारिवारिक वातावरण महसूस करे और ऐसे हालात से खुद को उबारे ।परिजनों को भी जवान के विषय में सीनियर अधिकारी को खुलकर जानकारी देना चाहिए ।तमाम ऐसे उपाय किये जाने चाहिए जो इस प्रकार की घटना को रोक सके ।घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए प्रयास होना चाहिए न कि घटना के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डालने का।

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