August 8, 2022
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कोरोना के बाद पत्रकारिता का आलम, कहीं खुशी कहीं गम

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा,

दंतेवाड़ा-पत्रकारिता के शुरुवाती युग में पैजामा-कुर्ताधारी,कलम-कागज, और एक साईकल के साथ मारा-मारा फिरता फक्कड़ को पत्रकार कहा जाता था ।धीरे से समय बदला और इस क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा होने लगी ।अब बड़े-बड़े भवन, प्रिंटिंग मशीनें और अधिक संख्या में अपने समूह के प्रकाशन का प्रसार की गलाकाट होड़ मचने लगी ।धनबल और बाजार से सीधा मुकाबला से कई समूह अपना अतित्व ही खो बैठे ।और अब जिले के प्रमुख भी अग्रिम धनराशि के बल पर बड़े समूह के प्रतिनिधि बनते गए ।अधिक प्रसार के होड़ में कुछ समूहों ने अपना सिक्का जमा लिया था ।ऐसे समय में कोरोना का आगमन हुआ ।अचानक से हुए इस विश्व की बीमारी ने इंसान के जीवन में अनेक बदलाव कर दिए ।चाय के साथ अखबार की पुरानी परम्परा को मोबाइल के व्हाट्सएप, फेसबुक, और पोर्टल ने ले लिया ।लोग घर बैठे ही मोबाइल में अखबार पढ़ने लगे ।इस समय लोगों के पास ढेर विकल्प थे ।अब समाचार के लिए खास समूह के बजाय तत्काल मिलने वाले जरूरी समाचार को लोगों ने हाथोंहाथ लेना शुरू किया और शुरू हुआ नया दौर ।अब प्रसार के लिए कई साधन मोबाइल ने आसानी से उपलब्ध करा दिए ।लेखन से जुड़े लोग अपना कौशल दिखाने लगे ।और एक स्वस्थ पत्रकारिता का प्रादुर्भाव हुआ।अलबत्ता कोरोना का तांडव अंतिम पड़ाव पर है और जिंदगी लौट आई है लेकिन लोगों पर कुछ स्थाई बदलाव भी आ गया है।फेरबदल में इस व्यवसाय से जुड़े अनेक रोजगार खत्म भी हुए,लेकिन समय के साथ इसे स्वीकार करते ही आगे बढ़ना होगा और कोरोना यह सीखा भी गया ।

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