December 5, 2021
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आतिशबाजी के बीच दंतेवाड़ा से पहुँची माई जी की डोली
बस्तर महाराज के साथ ही बस्तर सांसद, मंत्री, विधायक ने किया माईजी का स्वागत

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जिया न्यूज:-जगदलपुर,

जगदलपुर:-धार्मिक सहिष्णुता और सभी धर्मों के प्रति समादर का भाव रखने वाली सदियों पुरानी रस्म का नाम है मावली परघाव, मावली बस्तर की देवी हैं और उनके दन्तेवाड़ा से दशहरा पर्व में शामिल होने के लिए पधारने पर उनके स्वागत को परघाव कहते हैं, गुरुवार की रात दन्तेवाड़ा से आई मावली देवी के अभूतपूर्व स्वागत में श्रद्धालुओं का जन सैलाब पैलेस रोड में उमड़ पड़ा, दरअसल मावली देवी कर्नाटक राज्य के मलवल्क्य गांव की देवी हैं ,जो छिन्दक नागवंशीय राजाओं द्वारा उनके बस्तर के शासनकाल में आई थीं, छिन्दक नागवंशीय राजाओं ने नौवीं से चौदहवीं
शताब्दी तक बस्तर में राज्य किया, उसके बाद चालुक्य राजा अन्नमदेव ने जब बस्तर में अपना राज्य स्थापित किया तब उन्होंने देवी मावली को बस्तर की देवी के रूप में मान्यता दिलाई, वारंगल से अपनी कुलदेवी मणिकेश्वरी को उन्होंने समूचे बस्तर की आराध्य देवी बना दिया, परन्तु मौली देवी को यथोचित सम्मान देने के लिए मावली परघाव की रस्म शुरू की गई, इस विधान में राजा नगे पांव राजमहल से कुटरू बाड़ा के सामने पहुंच कर मावली देवी को परघा कर पूजा अर्चना के बाद उनकी डोली को राजगुरु और पुजारी कंधे पर उठाकर दंतेश्वरी मंदिर में लाकर रखा जाता है, दशहरे के समापन के बाद ससम्मान इनकी बिदाई होती है, बस्तर दशहरे के विधानों में समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलाव होते रहे हैं,सुरक्षा कारणों से तैनात पुलिस की घेराबंदी और सड़क के दोनों ओर लगाए बेरिकेट्स के कारण आम आदमी तो क्या प्रमुखः देवी देवताओं की सवारी को भी देवी मावली स्वागत के लिए जाने में अड़चन आती है,

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