September 21, 2021
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कोविड कॉल व 144धारा प्रभावशील गोपाल स्पंज आयरन उद्योग स्थापना हेतु 12 अप्रैल को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई पर लगे प्रतिबंध? -मुक्तिमोर्चा

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जिया न्यूज़:-जगदलपुर,

सरकार का कोविड काल मे बस्तर में स्पंज आयरन उद्योग स्थापना हेतु, 5 वी अनुसूची प्रवधान को ताक में रख,पर्यावरण की अनापत्ति अधिसूचना की जल्दबाजी क्यों?-मुक्तिमोर्चा

जिले में 7उद्योगों हेतु राज्य सरकार से एम ओ यू ,शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जा , निजी जमीनों पर उद्योग स्थापना हेतु प्रस्ताव क्यों?-नवनीत चाँद

जगदलपुर:-बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के मुख्य सयोंजक नवनीत चाँद ने बयान जारी कर कहा कि ,बस्तर जिले में कोविड संक्रमण फैलाव को देख राज्य सरकार की अनुशंसा पर जिला प्रशासन द्वारा 144 धारा प्रभावशील किया गया है।जिसके चलते किसी भी सार्वजनिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाया गया है। वही पर आगामी 12 अप्रैल को बस्तर ब्लाक के चपका ग्राम पंचायत में गोपाल मेसर्स प्रायवेट लिमिटेड कंपनी के स्पंज आयरन प्लांट स्थापना हेतु, 5 वी अनुसूची के संवेधानिक प्रवधानों के तहत सर्वोच्च सभा ग्राम सभा का आयोजन कर प्लांट स्थापना हेतु आनपत्ति लेने के बजाए, पर्यावरण विभाग द्वारा सीधे जनसुनवाई की अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिसकी तारिक 12 अप्रैल सुनिश्चित की गई है। जिस के पालन हेतु बस्तर प्रशासन द्वारा इस जनसुनवाई की तैयारी हेतु आदेश भी सम्बंधित प्रभावित ग्राम पंचयात को जारी किया जाना सरकार की तानाशाही रवैये को दर्शाता है। बस्तर में हमेशा उद्योग स्थापना की कायावात में नियमो व उनके परिपालन के दबावपूण तरीको का समस्त बस्तरवासियों द्वारा लगातार आपत्ति दर्ज कराया गया है। वर्तमान में सभी प्रभावित ग्राम पंचायतों के लोगो व जिले वाशियो को सम्पूर्ण प्रोजेक्ट की जानकारी देने व विरोध में बैठे ग्राम निवाशियो से सरकार द्वारा संवाद स्थापना के बजाइए सीधे 5 वी अनुसूची के प्रवधानों दरकिनार कर पर्यावरण विभाग की तरफ से जनसुनवाई रखना सरकारी जल्दबाजी को दर्षाता है। नगरनार स्टील प्लांट की स्थापना व वर्तमान में उतपन्न परिस्थितिया इस बात का सबूत है। जो बस्तर वाशियो को उद्योगों के स्थापना हेतु जल्दबाजी में कोई भी कदम लेने से रोक रहे है। बस्तर में अन्य स्पंज आयरन प्लांट लगे व उनकी दूर दशा व उनका बस्तर के विकास व रोजगार के प्रति योगदान पर उदासीनता इस बात का परिचायक है। की बस्तर में प्लांट संचालन को लेकर कम्पनी बेहद गम्भीर नहीं है। विडम्बना यह है। वर्ष 1992 में सरकार द्वारा बस्तर जिले में उधोगों की स्थापना हेतु हजारों एकड़ जमीन आबंटित की गई पर विभागीय व प्रशासनिक उदासीनता व लापरवाही के चलते अवैध कब्जा धारियों के भेंट चढ़ गई है। वर्तमान में पूरे बस्तर में कुल आबंटित जमीनों का 10 प्रतिशत जमीन ही कब्जा मुक्त है। पर अधिक टुकड़ो में बट्टे होने व उद्योगों की परिस्थितियों के हिसाब नही होने के कारण अब तक दर्जनों उधोगपतियो द्वारा जमीन के अवलोकन के बाद भी उद्योग विभाग को आबंटित जमीन पर उद्योग स्थापना हेतु प्रस्ताव की दिल चसबी नहीं दिखाई है। व सरकार व प्रशासन द्वारा बस्तर में उद्योग स्थापना हेतु बार बार निजी व वन भूमि का अधिग्रहण करने की कोसिस की जाती है। जो सरकार की नाकामी को दर्शाता है। व निजी जमीन का विरोध करने वाले बस्तर वाशियों को उद्योग विरोधी कह कर प्रचारित किया जाता है। जो पूरी तरह गलत है। मुक्तिमोर्चा राज्य सरकार की कमजोर उद्योग नीतियो का विरोध करती है। व अपील करती है। बस्तर में उद्योग को बढ़ावा मिले पर उद्योग विभाग की जमीनों पर स्थापना कर ,न कि बस्तर वाशियो की निजी जमीनों को बिना उनको विसवास में लिए अधिग्रहण कर के। वर्तमान में चपका में पर्यावरण जनसुनवाई में कोविड व धारा 144 की परिस्थितियों को को ध्यान में रख तत्काल रोक लगाई जाए। बस्तर वासियों को विसवास में लेकर ही सरकार बस्तर में उद्योग स्थापना की पहल करे।

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