July 1, 2022
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शिक्षाकर्मी आंदोलन का परिणाम है “शासकीय नियमित शिक्षक भर्ती”

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा,

आंदोनकारी का तमगा लगाने वालों को मिला जवाब।

22 वर्षो की लड़ाई ने छत्तीसगढ़ में नियमित शासकीय शिक्षक भर्ती को किया प्रारंभ।

शिक्षाकर्मियों की लड़ाई व्यक्तिगत लाभ के लिए नही समाज व बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए भी थी।

“शिक्षक नियमित” भर्ती नियुक्ति आदेश पत्र होने लगे जारी।

दंतेवाड़ा:-छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री शैलेश सिंह,कुलदीप सिंह चौहान जिला अध्यक्ष उदयप्रकाश शुक्ला जिला सचिव नोहर सिंह साहू ने कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज से नियमित व्याख्याता ई व टी संवर्ग के नियुक्ति आदेश जारी होना प्रारंभ हो गया है DPI ने आज ही 500 व्याख्याता शिक्षकों के आदेश जारी होने की बात कही है।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि 1993 के बाद नियमित शिक्षकों की भर्ती मध्यप्रदेश शासनकाल में बंद कर दी गयी थी उसके बाद शिक्षा कर्मी प्रथा प्रारंभ हुआ था तात्कालिक समाज व शिक्षकों ने इस नई प्रथा का विरोध नही किया था जिसका परिणाम समाज व शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा। शिक्षा कर्मियो का आंदोलन शिक्षक पद की गरिमा बनाने के लिए भी था,,अब शिक्षा कर्मियो के आंदोलन के बाद शासकीय नियमित भर्ती से समाज मे शिक्षको का गौरव पुनः वापस मिल रहा है।

शिक्षा कर्मी व्यवस्था न्यायोचित नही थी इसलिए 1998 से ही भर्ती के बाद मातृ संगठन संविलियन की मांग करता रहा व अपने अधिकारों के लिए व नियमित करने नियमित भर्ती करने की मांगों को लेकर सड़क से सदन तक अपनी आवाज बुलंद करता रहा, शिक्षा गारंटी गुरुजी से लेकर संविदा शिक्षक,शिक्षा कर्मी,शिक्षक पंचायत,नाम दिया गया इस बीच सरकार व समाज ने हमेशा शिक्षा कर्मियों को आंदोनकारी, हड़ताली कर्मचारी का तमगा लगा दिया हर वर्ष आंदोलन,शिक्षकों की शहादत,जेलयात्रा झेला हमने लेकिन आज उसका परिणाम समाज, शिक्षा व बेरोजगार युवाओं को होने लगा है शिक्षा कर्मी व्यवस्था के विरोध का आज सुखद परिणाम आना प्रारम्भ हो गया है नियमित भर्ती के रूप में आने वाली पीढ़ी व नवीन भर्ती हुए शिक्षकों को शिक्षा कर्मियों के दर्द व भेदभाव का सामना नही करना पड़ेगा, सभी नवीन नियुक्ति होने वाले प्रदेश के युवा शिक्षकों को बधाई शुभकामनाएं व सरकार को धन्यवाद जिन्होंने यह मजबूत कदम उठाया व इस काले अध्याय को हमेशा हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।

“22 बरस यातनाओं का दर्द झेला है हमने लाठीचार्ज, जेलभरो, जल सत्याग्रह,एस्मा, क्रमिक भुख हड़ताल, निलंबन बर्खास्तगी,दुधमुंहे बच्चो की चीखें रुदन,नजरबंद,दोयम दर्जे का व्यवहार,भेदभाव,शुलभ शौचालय तक बंद करा देना समाज की उलहाना बहुत कुछ देखा जो अब भर्ती हुए साथीयो नई पीढ़ी को नही देखना पड़ेगा।”

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