September 21, 2021
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राकेश्वर और मुरली में आखिर क्या फर्क मिला माओवादियों को
विक्षिप्त जवान पर बर्बरता क्यों?

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जिया न्यूज़:-दंतेवाड़ा,

दंतेवाड़ा:-अंततःसारे कयासों औऱ प्रयासों,उम्मीदों को तोड़ते माओवादियों ने विक्षिप्त जवान को मौत के घाट उतार ही दिया और तर्क दिया कि वह अनेक नक्सल विरोधी अभियान का हिस्सा था ।प्रश्न उठता है कि राकेश्वर कौन सा नक्सल समर्थक था ।क्या मुरली ताती के प्रति सहानुभूति जायज नहीं था?क्या उस जवान का परिवार नहीं था?आमतौर पर नक्सली ऐसा आचरण नहीं करते लेकिन इस जवान के प्रति ऐसी बर्बरता बेहद ही सोचनीय विषय है ।जवान के परिजन गुहार लगाते रहे लेकिन यह गुहार और इससे पहले वाले जवान के परिजनों के गुहार में नक्सली अंतर कर मौत की सज़ा दी ।सरकार, मीडिया सहित तमाम संगठन मध्यस्थ बनने तैयारी कर रहे थे लेकिन अचानक ही हैरान करने वाली खबर से पूरा देश हतप्रभ हुआ ।मौत की सजा के परे अनेक विकल्प होने के बावजूद इस तरह की घटना से प्रदेश सिहर उठा ।कोरोना महामारी के इस दौर में शासन-प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनते ये लाल लड़ाके परेशानी का सबब बन गए हैं ।उम्मीद होगी कि इस तरह के वारदात से माओवादी परहेज करेंगे और अपने ही बनाये नियमों, सिद्धांतो पर कायम रहकर शरणागत अपहृतों पर सहानुभूति रखेंगे ।

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